वेरी गुड..
मानसिंह शरद, प्रसिद्ध व्यंग्यकार, उज्जैन “रामस्वरूप जी, आपने आज जो हिंदी दिवस पर शानदार कार्यक्रम आयोजित किया, मन प्रसन्न हो गया। हिंदी के उत्थान के लिए आपका कार्य वंदनीय है।” “ऐसा कुछ नहीं, मित्र प्रमोद। मैं तो हिंदी का छोटा सा सेवक हूँ। कार्यक्रम के पीछे मेरा यही उद्देश्य होता है कि हिंदी में साहित्य…
