वेरी गुड..

मानसिंह शरद, प्रसिद्ध व्यंग्यकार, उज्जैन “रामस्वरूप जी, आपने आज जो हिंदी दिवस पर शानदार कार्यक्रम आयोजित किया, मन प्रसन्न हो गया। हिंदी के उत्थान के लिए आपका कार्य वंदनीय है।” “ऐसा कुछ नहीं, मित्र प्रमोद। मैं तो हिंदी का छोटा सा सेवक हूँ। कार्यक्रम के पीछे मेरा यही उद्देश्य होता है कि हिंदी में साहित्य…

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क्या हिंदी सनातन का आधार है?

हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत धारा का सेतु है। संस्कृत जहाँ गूढ़ ज्ञान की वाहक है, वहीं हिंदी उसे सरल बनाकर लोकजीवन तक पहुँचाती है। संत तुलसीदास, सूरदास, कबीर और मीरा ने हिंदी को संस्कृति और भक्ति का सशक्त वाहक बनाया। महात्मा गांधी ने इसे “जन की भाषा” कहा। हिंदी संवाद का माध्यम होने के साथ-साथ स्वतंत्रता, आत्मगौरव और राष्ट्र चेतना की वाणी भी रही। यह भाषा वेदों की ऊँचाई और गाँव की मिट्टी की महक दोनों लिए हुए है, और हमें इसे प्रतिदिन बोलने, पढ़ने और लिखने से ही जीवित रखना चाहिए।

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हिंदी हमारी भाषा

हिंदी हमारी मातृभाषा है, सहज अभिव्यक्ति और समृद्ध शब्दों वाली, जिसका आधार संस्कृत में है। यह भाषा भारतीयों के लिए भाव, सौंदर्य और संस्कृति का प्रतीक है। हिंदी हमें अनुभूतियों, छंद, अलंकार और दोहों के माध्यम से जोड़ती है। यह माँ के आँचल जैसी शीतलता देती है, और जनमानस में गंगा की तरह पावन तरंगें फैलाती है। हिंदी साहित्य का उपवन हमेशा सुवासित और पल्लवित रहे, यही हमारी कामना है।

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