Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

रोशनी के दोहे

दीपों के इस पर्व में घर-घर उजाला फैलता है और खुशियाँ अपार होती हैं। सज-धज कर बाजारों में रौनक है, फूल और मिठाइयाँ बिक रही हैं। हर मन में राम की ज्योति बसती है और प्रीति व उजाला हर ओर दिखाई देता है। अहंकार और वहम को छोड़कर प्रभु का नाम जपने से, अच्छे कर्मों के माध्यम से सुख और शांति प्राप्त होती है।

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बड़की

संयुक्त परिवार की रसोई सिर्फ़ खाना पकाने की जगह नहीं होती, वहाँ रिश्तों की आँच भी सुलगती है।
सुनीता को आज समझ आया कि कमाना ही पर्याप्त नहीं, घर के कामों में हाथ बँटाना भी उतना ही ज़रूरी है। बड़ी भाभी ललिता की चुप्पी में शिकायत नहीं, थकान छिपी थी उस जिम्मेदारी की जो उन्होंने बरसों से बिना शोर उठाई थी। कभी-कभी रिश्तों में तकरार इसलिए नहीं होती कि कोई गलत है, बल्कि इसलिए कि कोई दूसरे की थकान देख नहीं पाता।

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वो कुछ लोग…

ज़िंदगी भी एक ट्रेन की तरह है — जो धीरे-धीरे रफ़्तार पकड़ते हुए हमें आगे ले जाती है। हर पड़ाव पर कुछ न कुछ पीछे छूट जाता है — कोई शहर, कोई गलियां, कुछ अपने लोग। लेकिन जो सच में हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके होते हैं, वे कभी पूरी तरह नहीं छूटते। वे ठहरे रहते हैं — हमारी यादों में, हमारी भावनाओं में, और उस अगली मुलाक़ात की उम्मीद में, जैसे स्टेशन पर खड़े वे लोग जो ट्रेन गुज़र जाने के बाद भी कुछ देर तक हाथ हिलाते रहते हैं… यादें, उदासी और इंतज़ार लिए।

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मैं हिंदी बोल रही हूँ

हिंदी ने वर्षों से भारतीय संस्कृति, साहित्य और जनजीवन में गहरी जड़ें जमा रखी हैं। यह अपने देश में राजभाषा के रूप में पूर्ण सम्मान की आकांक्षा रखती है। विदेशी विश्वविद्यालयों और विश्व हिंदी सम्मेलनों में इसका सम्मान है, मगर अपने देश में इसे संवैधानिक रूप से राष्ट्रभाषा घोषित नहीं किया गया। यह पाठ हिंदी के गौरव, संघर्ष और उसके महत्व को बखूबी उजागर करता है।

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हिंदी दिवस

यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करती है। इसमें बताया गया है कि हमारी भावनाएँ, प्रेम, ज्ञान और भक्ति—सभी हिंदी में अभिव्यक्त होती हैं। पहले शब्दों से लेकर वेद, उपनिषद और गीता तक, पूजा-अर्चना और भजन तक, हिंदी भाषा हमारे जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हिंदी दिवस का यह संदेश हमें अपनी मातृभाषा को पढ़ने, लिखने और अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

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वेरी गुड..

मानसिंह शरद, प्रसिद्ध व्यंग्यकार, उज्जैन “रामस्वरूप जी, आपने आज जो हिंदी दिवस पर शानदार कार्यक्रम आयोजित किया, मन प्रसन्न हो गया। हिंदी के उत्थान के लिए आपका कार्य वंदनीय है।” “ऐसा कुछ नहीं, मित्र प्रमोद। मैं तो हिंदी का छोटा सा सेवक हूँ। कार्यक्रम के पीछे मेरा यही उद्देश्य होता है कि हिंदी में साहित्य…

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क्या हिंदी सनातन का आधार है?

हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत धारा का सेतु है। संस्कृत जहाँ गूढ़ ज्ञान की वाहक है, वहीं हिंदी उसे सरल बनाकर लोकजीवन तक पहुँचाती है। संत तुलसीदास, सूरदास, कबीर और मीरा ने हिंदी को संस्कृति और भक्ति का सशक्त वाहक बनाया। महात्मा गांधी ने इसे “जन की भाषा” कहा। हिंदी संवाद का माध्यम होने के साथ-साथ स्वतंत्रता, आत्मगौरव और राष्ट्र चेतना की वाणी भी रही। यह भाषा वेदों की ऊँचाई और गाँव की मिट्टी की महक दोनों लिए हुए है, और हमें इसे प्रतिदिन बोलने, पढ़ने और लिखने से ही जीवित रखना चाहिए।

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हिंदी हमारी भाषा

हिंदी हमारी मातृभाषा है, सहज अभिव्यक्ति और समृद्ध शब्दों वाली, जिसका आधार संस्कृत में है। यह भाषा भारतीयों के लिए भाव, सौंदर्य और संस्कृति का प्रतीक है। हिंदी हमें अनुभूतियों, छंद, अलंकार और दोहों के माध्यम से जोड़ती है। यह माँ के आँचल जैसी शीतलता देती है, और जनमानस में गंगा की तरह पावन तरंगें फैलाती है। हिंदी साहित्य का उपवन हमेशा सुवासित और पल्लवित रहे, यही हमारी कामना है।

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दिल की भाषा

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि दिल और दिमाग का मिलन, आपसी तालमेल और संस्कृति का प्रतीक है। यह राष्ट्रीय भाषा न होकर भी हर व्यक्ति के भीतर निकलने वाली आवाज़ है, मौखिक और लिखित संचार का जरिया है। नए ज़माने के साथ इसे भूलना नहीं चाहिए, क्योंकि यह धरोहर है जिसे संभाल कर रखना आवश्यक है।

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मैं हूं सूखी लकड़ी..

मैं सूखी लकड़ी हूं, जीवन में हितकारी और हर रूप में कल्याण फैलाने वाली। मैं शिव के मस्तक पर सजती हूं, कृष्ण की बांसुरी की तान में झूलती हूं, घरों में झूले और पलनों का आधार बनती हूं, और रोगियों का उपचार भी करती हूं। हर कदम पर मेरी उपस्थिति है—सृष्टि, श्रद्धा और जीवन के हर पहलू में। यही मेरी शक्ति और पहचान है।

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