यह लेख पुराने जमाने की रेलवे टिकटिंग, हॉफ टिकट और टिकट कलेक्शन के अनुभवों को यादगार अंदाज में पेश करता है। यात्रा और रेलवे से जुड़ी यादें, nostalgically बयान की गई हैं।

हॉफ टिकट : यादों का स़फर

यह लेख पुराने जमाने की रेलवे टिकटिंग और हॉफ टिकट के अनुभवों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। कैसे कार्डबोर्ड टिकट, तेज आवाज़ वाली मशीन और टिकट कलेक्शन का खेल यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की यादों में आज भी खास जगह रखता है, इसे विस्तार से बताया गया है।

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मुंबई का बच्चा : इंदौर

इंदौर को मुंबई का बच्चा क्यों कहा जाता है, सवाल कई लोगों के मन में होगा। जवाब यही है कि जैसे बच्चा अपने पिता की रेप्लिका होता है , वैसे हो इंदौर मुंबई की रेप्लिका ही है। वैसा ही उद्यमी स्वभाव, कॉस्मोपोलिटन जीवन, आधुनिकता और पुरातन का सम्मिश्रण, 24 घंटे जागने वाला, नई तकनीकों और विचारों स्वागत करता हुआ मराठी भाषियों का प्रिय शहर ! यहां मराठीभाषियों का वर्चस्व इसलिए रहा कि महाराष्ट्र से नज़दीकी है और यहाँ के शासकों मराठी भाषी रहे हैं।

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त्र्यंबकेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर ठगी

. महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं के बाद अब त्र्यंबकेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से ठगी का मामला सामने आया है. मंदिर ट्रस्ट के एक ट्रस्टी ने अपने भतीजों के माध्यम से भाविकों से हजारों रुपये वसूलने का खेल चला रखा था. पुलिस ने इस मामले में ट्रस्टी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि मात्र आधे घंटे में चार श्रद्धालुओं से 9 हजार रुपये की ठगी की गई.

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माँ के दो हाथों की टोकरी

माँ के दो हाथों की टोकरी में ज़िंदगी सिमटी रहती है। कुछ आड़ी-तिरछी रेखाएँ हैं, बिल्कुल सटीक नहीं, लेकिन उनमें वही अपनापन है जैसे माँ की हथेलियाँ। वह टोकरी, जिसमें माँ एक जीवन को सम्भालकर रखती है, उसे पालती-पोसती है, दुलारती है। समय बीत गया, दुनिया बदली, मैं भी बहुत बदल गई, पर तेरे भीतर अब भी वही मासूमियत है—वही छोटे-से बच्चे की छवि, जो छोटी-छोटी गलतियाँ दोहराता है और माँ की हथेली पर सुरक्षित रहता है। लेकिन इस जंगल जैसी दुनिया में तुझे कैसे रखूँ? यही सोचकर दिल कांप जाता है। आ जा फिर मेरी हथेली में, छुप जा आंचल में, चैन से सो जा। इस भागदौड़ और छल-कपट को भूल जा, क्योंकि यह जीवन-जंगल कोई खेल नहीं। इसका अंत केवल एक “जंगल-आग” है।

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सावन, राखी और एक खाली दहलीज़

हर बेटी के लिए मायका सिर्फ़ घर नहीं, सांसों की मिट्टी होता है।पर कुछ बेटियों के हिस्से वो आँगन नहीं आता, जहां राखी, सावन और तीज मुस्कुराते थे। उनके त्योहार भी सादे, आंखें भीगी, और दिल भीतर से थोड़ा रिक्त रहता है…

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खुद से खुद की जंग

तुम्हारे जाने के बाद ज़िंदगी अचानक खाली हो गई थी। जो आदतें कभी सुकून देती थीं, वही अब चुभने लगीं। तब समझ आया कि सहारे पर जीना आसान होता है, पर खुद खड़े होना सीखना ज़रूरी। उसी खालीपन में मैंने खुद को पहचाना और धीरे-धीरे अपनी ही ज़िंदगी की लड़ाई लड़ना सीख लिया।

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ग़ज़ल 

जब दिल के मचलते भाव किसी अक्षर को ढूँढ लेते हैं, तो उन्हें बयान करने का अंदाज़ भी खोज लिया जाता है। जिन्हें उड़ने की चाहत होती है, वे पर ढूँढ लेते हैं और ज़मीन पर रहते हुए भी अपना आसमान पा लेते हैं। बच्चे बिना समझे पराए के अंतर को भी पहचान लेते हैं। उन्हें कमजोर करना आसान नहीं होता, क्योंकि अँधेरे में भी वे अपने मार्ग को प्रकाशमान बना लेते हैं। जो अपनी किस्मत खुद लिखते हैं, उन्हें अपने प्रयास पर विश्वास होता है और अवसर अपने आप ढूँढ लेते हैं। जिनके लिए मकान पक्का हो या न हो, वे सियासत के ज्वलनशील शोले भी पार कर लेते हैं। यह शरीर मिट्टी का बना है और मिट्टी में ही लौटना है, फिर भी वे अपनी आत्मा के दूसरे रूप को खोज लेते हैं। जब तक साँस चलती है, अर्चना को भी फुर्सत नहीं होती, फिर भी कुछ पल के लिए सुकून पा लेते हैं।

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ग्रामीण बस स्टैंड पर डरी हुई स्कूल गर्ल, महिला सुरक्षा और शिक्षा पर सवाल

स्वाभिमान का खून

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा क्या सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है? यह लेख बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान की जमीनी सच्चाई को उजागर करता है।

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जीवन जंग नहीं

यह कविता जीवन को केवल संघर्ष और काँटों से भरा हुआ मानने की मानसिकता को तोड़ती है। कवि कहता है कि जीवन सिर्फ कठिनाइयों और कटु अनुभवों का नाम नहीं है, बल्कि इसमें फूलों जैसी सुंदरता, मधुरता और उमंगें भी समाई हुई हैं।
जीवन की राह में यदि कोई विचलित होकर बीच में ही रुक जाए तो वह अपने लक्ष्य तक कभी नहीं पहुँच सकता। पराजय के डर से भागने वाला कभी विजयी नहीं कहलाता। अंधकार से भयभीत होकर रुकने वाला व्यक्ति प्रकाश की ओर कदम नहीं बढ़ा सकता। दूरी से हताश होने वाला कभी मंज़िल तक नहीं पहुँच पाता।

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वीर-रस की प्रेरणादायक हिंदी कविता का प्रतीकात्मक दृश्य

कायरों की भांति बैठना नहीं

कायरता को त्याग कर निर्भय संघर्ष का आह्वान करती यह कविता मनुष्य को लक्ष्य, धैर्य और कर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। वीर-रस का प्रभावशाली घोष।

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