Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
लाल जोड़े में सजी एक भारतीय दुल्हन विदाई के समय आँसुओं से भरी आँखों के साथ पीछे की ओर चावल फेंकती हुई दिख रही है, पास में खड़े माता-पिता भावुक हैं और शादी का सजा हुआ मंडप पृष्ठभूमि में दिखाई दे रहा है।

कन्यादान

यह भावनात्मक कविता एक दुल्हन के विवाह के हर पल को जीवंत करती है शर्माती मुस्कान से लेकर विदाई के आँसुओं तक। इसमें माँ-बाप से बिछड़ने का दर्द, नए जीवन की शुरुआत और रिश्तों की गहराई को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

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विरह में डूबी युवती, पायल और कंगन पहने, चाँदनी रात में खिड़की के पास बैठी, आँखों से अश्रुधारा बहती हुई, उदासी और प्रतीक्षा का गहरा भाव।

कैसे आऊँ मैं तुमसे मिलने…

यह रचना और दृश्य विरह के उस क्षण को दर्शाते हैं, जहाँ श्रृंगार, आभूषण और सपने सब धुल चुके हैं, और केवल प्रतीक्षा शेष है। पायल की झंकार और कंगनों की आवाज़ मन की उलझनों का प्रतीक बन जाती है। चाँदनी रात, कोरा काग़ज़ और पहरेदार बनी उदासी सब मिलकर प्रेम की उस पीड़ा को रचते हैं, जहाँ मिलने की चाह सबसे बड़ी व्याकुलता बन जाती है।

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महिदपुर रोड का पहला जलसा: चटर्जी नाइट

साल 1980 का महिदपुर रोड, गलियों में हलचल थी और हर कोई पहले बड़े जलसे “चटर्जी नाइट” की तैयारियों में व्यस्त। यह जलसा प्रिय शिक्षक स्व. कपूर साहब की स्मृति में आयोजित किया गया था। मंच की कमी के बावजूद विद्यार्थियों ने खाली ड्रम और लकड़ी के स्लीपर से एक शानदार मंच तैयार किया। जब प्रभात चटर्जी और उनका आर्केस्ट्रा मंच पर आए, तालियों और उत्साह की गूँज में पूरा महिदपुर रोड मंत्रमुग्ध हो गया। यह केवल संगीत का आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और जुनून की मिसाल बन गया।

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जड़ें और बेलें

यह कथा कार्यस्थल पर छिपे शोषण और नकली सहयोग की पहचान कराती है। अमरबेल के सशक्त प्रतीक के माध्यम से यह संदेश देती है कि जिनकी अपनी जड़ें नहीं होतीं, वे दूसरों की मेहनत से पनपते हैं। आत्मबोध और सीमाएँ तय करना ही आत्मरक्षा और सशक्तिकरण का पहला कदम है।

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तुम क्या जानो…

तुम प्रेम को अधिकार और जीत मानते रहे, जबकि मेरे लिए यह समर्पण और खामोशी रहा। हर औरत में कहीं न कहीं एक मीरा होती है, जो बिना प्रतिदान की आशा प्रेम करती चली जाती है। हर युग में प्रेम तुमने जीता है, और हमने उसे जिया है—उस दर्द, विरह और त्याग के साथ।

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उज्जैन की बेटी ने पोलैंड में बढ़ाया भारत का मान

मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर के लिए गर्व का पल। नगर की ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर आयशा सना कुरैशी ने पोलैंड में आयोजित प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में ‘मिस इंडिया पोलैंड 2025’ का ताज जीतकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत और प्रदेश का नाम रोशन किया।

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तेरी बिंदिया रे…..

जहां शायरों ने, कवियों ने, औरत की सुंदरता के लिए अनेकों उपमानों का प्रयोग किया है, जैसे झील सी गहरी आंखें, हिरण सी सुंदर आंखें, सुराही दार गर्दन, मोरनी सी चाल, वहीं एक प्रेमी, अपनी प्रेमिका की बिंदी पर मर मिटा है,और वह चाहता है कि चाहे वह और कोई श्रृंगार करें या ना करें ,सिर्फ एक छोटी सी बिंदी वह अपने माथे पर लगा ले, और उसे किसी भी उपमान की जरूरत नहीं होगी।

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अंधेरी गली में भूखा बच्चा, पृष्ठभूमि में झगड़ा और सामने जलता हुआ दीया, जो उम्मीद का प्रतीक है.

चीखती इंसानियत

यह कविता इंसानियत के दर्द, टूटते रिश्तों और बढ़ती नफरत की सच्चाई को उजागर करती है, लेकिन साथ ही करुणा, प्रेम और संवेदना के जरिए बदलाव की उम्मीद भी जगाती है.

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डाकिया डाक लाया

जब मोबाइल और ई-मेल नहीं थे, तब खत ही रिश्तों की धड़कन हुआ करते थे। पोस्टकार्ड से लेकर लिफाफे तक, हर पत्र में सिर्फ़ खबर नहीं, पूरा जीवन लिखा होता था। यह कहानी उसी इंतज़ार, उस स्याही और उन भावनाओं की है, जो आज भी दिल को भिगो देती हैं।

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मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देते दो सच्चे दोस्तों का भावुक और यथार्थवादी दृश्य।

सच्चा दोस्त : एक अनमोल तोहफ़ा

यह कविता सिर्फ़ शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि मेरे अपने जीवन के एक बेहद खूबसूरत सच का हिस्सा है। मेरी ज़िंदगी के हर उतार-चढ़ाव में, मेरी हर छोटी-बड़ी कामयाबी में और ख़ासकर मेरे सबसे कठिन समय में, मेरे सच्चे दोस्त ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है। इस निस्वार्थ परवाह और साथ के लिए शब्दों में शुक्रिया कहना मुमकिन नहीं, पर यह कविता मेरे उसी अज़ीज़ दोस्त को एक छोटा-सा समर्पण है।

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