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आसमान की ओर देखते हुए आत्मचिंतन में डूबा एक युवा, जो अपनी पहचान और जीवन के उद्देश्य की तलाश कर रहा है।

मैं कौन हूँ ?

“मैं कौन हूँ?”—यह सिर्फ़ तीन शब्दों का सवाल नहीं, बल्कि पूरी ज़िंदगी का सफ़र है। यह लेख एक युवा की आत्मखोज, संघर्ष, बदलाव, आत्मविश्वास और सपनों की कहानी है, जो बताती है कि इंसान की असली पहचान उसके निरंतर सीखने और बदलने की प्रक्रिया में छिपी होती है।

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कश्मीर की तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों से अधूरी रह रही कश्मीर यात्रा की इच्छा इस बार पूरी हुई। गर्मियों की छुट्टियों में जब शर्ली और जेमी दोनों घर पर थे, तो परिवार ने दृढ़ निश्चय किया — अबकी बार कश्मीर पक्का! २१ मई को हमने जम्मू के लिए ट्रेन पकड़ी और वहां से शुरू हुआ श्रीनगर की ओर रोमांचक सफर, जिसमें चेनानी-नाशरी सुरंग की तकनीकी भव्यता और घाटियों की नैसर्गिक सुंदरता ने मन मोह लिया। रास्ते की कठिनाइयों के बावजूद श्रीनगर की समतल घाटी का सौंदर्य जैसे हर थकान को हर लेता है। होटल अल-शिमाघ में गर्मजोशी से स्वागत के बाद शुरू हुई हमारी असली कश्मीरी यात्रा — डल झील, मुगल बाग, लाल चौक और हिमालयी सौंदर्य से सराबोर सोनमर्ग, गुलमर्ग, पहलगाम की रोमांचकारी यात्राएं।

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कुछ रंग ऐसे भी… | रिश्तों, धोखे और ख़ामोशी पर विचारशील कविता

कुछ रंग ऐसे भी…

यह कविता जीवन के उस कैनवास की कथा है, जहाँ धोखे और बनावटी रंग इतने फैल जाते हैं कि प्रेम, अपनेपन और आत्मा के रंग खो से जाते हैं, और बचती है केवल ख़ामोश उदासी।

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पितरों की तस्वीर: कहाँ और कैसे लगाएं

घर में पितरों की तस्वीर लगाने का उद्देश्य सिर्फ स्मरण करना नहीं, बल्कि वास्तुशास्त्र के अनुसार सही दिशा और स्थान पर रखकर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना है। गलत स्थान या दिशा पर तस्वीर लगाने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। इसलिए पितरों की तस्वीर को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में, दक्षिण की ओर मुख करके रखना सर्वोत्तम माना जाता है।

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गुड़ वाली चाय और मैं

गुड़ वाली चाय और मैं दोनों थोड़े देसी, थोड़े अनगढ़, पर पूरी तरह ईमानदार। जैसे गुड़ अपने रंग को धीरे-धीरे पानी में खोलता है, वैसे ही मेरी मिठास भी समय लेकर सामने आती है। सादगी में भी स्वाद छिपा होता है, यही हमें एक-दूसरे से जोड़ता है।

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सकारात्मक सोच और आत्मचिंतन को दर्शाता प्रेरणादायक हिंदी लेख

परिस्थितियों को दोष देना छोड़ दें…!

परिस्थितियाँ हमारे जीवन की दिशा तय नहीं करतीं, बल्कि हमारी सोच उन्हें अर्थ देती है। एक ही स्थिति में कोई टूट जाता है और कोई निखर जाता है अंतर केवल मानसिकता का होता है। जब मन में विश्वास होता है, तब कठिन रास्ते भी सहज हो जाते हैं। जीवन को बदलने के लिए पहले दृष्टिकोण को बदलना आवश्यक है।

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प्रकृति के बीच अकेली स्त्री, घास पर बैठी आसमान की ओर देखती हुई, आत्मचिंतन का शांत दृश्य

फिर कभी न लौटने के लिए…

“फिर कभी न लौटने के लिए…” एक गहन भावनात्मक और दार्शनिक कविता है, जिसमें कवयित्री तन्हाई, प्रकृति और आत्म-अन्वेषण के माध्यम से जीवन के गूढ़ प्रश्नों को समझने की कोशिश करती है। यह कविता आत्मा की शांति और अस्तित्व की खोज का संवेदनशील चित्रण है।

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दरिया और किनारा

कविता में दरिया को जीवन के संघर्ष और पवित्रता का प्रतीक बनाया गया है। दरिया मस्ती और ऊर्जा के साथ बढ़ती है, अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को पार करती है, किनारों से संबंध बनाए रखती है और दूसरों के कष्ट और पापों को समेटती है। यह अपने गंतव्य की ओर दृढ़ता और गति से बढ़ती है, अंततः समुद्र की विशाल बाहों में विलीन होकर अपने सफर का निष्कर्ष प्राप्त करती है। यह कविता दर्शाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, संयम, धैर्य और अपने मूल्यों के साथ मार्ग पर बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है।

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इंदौर के मानस भवन सभागार में आयोजित साहित्य सम्मान समारोह में पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल को सम्मानित करते हुए अतिथि एवं आयोजक।

पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल सम्मानित

विश्व हिंदी प्रचारिणी महासभा और यूनिक यूनिवर्सल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा इंदौर में आयोजित साहित्यिक समारोह में कवयित्री पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल को उनके साहित्यिक योगदान और काव्य प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया।

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