gulmohar

मेरी अर्थी

: मेरी अर्थी कविता में मृत्यु के बाद दिखावे की संवेदनाओं और मातम का प्रतीकात्मक दृश्य मौत के बाद होने वाले दिखावे और झूठी संवेदनाओं पर एक बेबाक कविता।

रीता मिश्रा तिवारी, भागलपुर

मौत पर मेरी मातम मनाना नहीं,
अश्कों का कहर बरपाना नहीं,
दुखों के अंबार पर बैठकर मेरे,
दर्द का मखौल उड़ाना नहीं.
हँसी के फब्बारे बरसाने वाले,
हां..मेरी अर्थी को कांधा देना नहीं।

मायूसी की चादर ओढ़कर,
गमज़दा होकर बैठना नहीं,
कैसे कटेंगे अब दिन मेरे,
भले मानस थे ये कहकर मेरे,
तारीफों के पुल बांधना नहीं,
हां..मेरी अर्थी को कांधा देना नहीं।

सच्चाइयों पर पर्दा डालना नहीं,
इक नई कहानी बुनना नहीं,
दुःख का दिखावा करना नहीं,
रियलिटी का रील बनाकर मेरे,
शव पर संवेदना बटोरना नहीं,
हां..मेरी अर्थी को कांधा देना नहीं।
इन रचनाओं को भी पढ़ें और अपनी प्रतिक्रियाएं अवश्य दें
मुन्ना से कीर्ति राणा
ईशमधु तलवार स्मृति शाकुन्तलम सम्मान 2026 जयपुर की लेखिका संतोषी को
सफ़र की यादें
मेरी अर्थी
जीवनधारा: बदनाम गली में इंसानियत की तलाश
‘रिहाई’
वर्तमान की गुफ्तगू
मुन्ना से कीर्ति राणा
प्यार का इंतज़ार

5 thoughts on “मेरी अर्थी”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *