मेरी अर्थी
क्या किसी के जाने के बाद आँसू बहाना और उसकी तारीफों के पुल बाँधना ही सच्ची संवेदना है? ‘मेरी अर्थी’ कविता मौत के बाद होने वाले दिखावे, झूठे मातम और सोशल मीडिया पर संवेदनाएँ बटोरने की मानसिकता पर तीखा व्यंग्य करती है। यह कविता रिश्तों की सच्चाई और इंसान के दोहरे व्यवहार को बेबाक शब्दों में सामने रखती है।
