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फुगी, नवी और मैं

वी घाव चाटकर बिल्ली को ठीक करती है, कबूतर के मरने पर रोती है, और हर जीव को अपनाने की अद्भुत ताकत रखती है। कभी-कभी लगता है वह बोल नहीं सकती, पर सुनना, समझना और प्रेम बाँटना उसे हम इंसानों से कहीं बेहतर आता है।

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महिदपुर रोड: प्यार, सहयोग और परंपरा की धरती

महिदपुर रोड एक ऐसी जगह है जहाँ सेवा और अपनापन हर घर में बसा है। रात के अंधेरे में भी किसी की तबीयत बिगड़े तो सौभाग दादा का ट्रक हमेशा एंबुलेंस की तरह तैयार रहता था। यहाँ हर मुस्कान, हर रिश्ते में परंपरा और निस्वार्थ सेवा की गंध महसूस होती है।

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सावन, राखी और एक खाली दहलीज़

हर बेटी के लिए मायका सिर्फ़ घर नहीं, सांसों की मिट्टी होता है।पर कुछ बेटियों के हिस्से वो आँगन नहीं आता, जहां राखी, सावन और तीज मुस्कुराते थे। उनके त्योहार भी सादे, आंखें भीगी, और दिल भीतर से थोड़ा रिक्त रहता है…

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रील्स की चमक में खो गई वो पुरानी शादी

कभी शादियाँ सिर्फ दो लोगों का नहीं, पूरे मोहल्ले का उत्सव हुआ करती थीं। ढोलक की थाप पर गाए जाने वाले बन्ने-बन्नी के गीत, बुआ-मौसी की हंसी, आँगन में उबलती खीर . सब जैसे आज भी स्मृतियों में ताजे हैं। पर अब शादी की रस्में कैमरे की फ्रेमिंग में बंध गई हैं, और भावनाएँ फिल्टरों के नीचे धुंधली।

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आसान नहीं है पुरुष होना…

पुरुष होना कई मायनों में सरल नहीं। दुनिया उन्हें मजबूत देखना चाहती है, मगर दर्द छुपाने की कला में वे अक्सर अकेले पड़ जाते हैं। हम लड़कियाँ आँसू पोंछने को काजल-लाइनर का सहारा ले लेती हैं, मुस्कान को लिपस्टिक से गहरा कर देती हैं। पर पुरुष? वे रोते भी कम हैं और जब रोते हैं तो छुपाने की सुविधा भी कहाँ होती है उनके पास।

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स्वार्थ…

टूटते और जुड़ते दिल की आदत, बार-बार धोखे और छल का सामना करना, और अंततः यह समझ कि दुनिया में प्यार और वफ़ा केवल स्वार्थ के पीछे छुपे होते हैं यही इस अनुभव की सार्थकता है। पाठ में व्यक्तिगत पीड़ा और जीवन की कठोर सच्चाइयाँ एक साथ बुनी गई हैं,

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छोटे कस्बे में रात के मेले में लगी नाटक कंपनी का मंच, रोशनी, भीड़ और डांस परफॉर्मेंस का जीवंत दृश्य

1 रुपये की टिकट, हज़ारों यादें..

महिदपुर रोड के टंकी चौराहे पर, नाटक कंपनी की रौनक हर साल एक अलग ही दुनिया बुनती थी। 1 रुपये की टिकट पर रात का एक शो जहाँ नाटक के बीच में डांसर अपनी नृत्य कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती। दर्शक नोट ऊपर उठाकर सम्मान देते, डांसर की नज़रें जैसे जवाब देतीं, और कोई कलाकार तुरंत नोट उठाकर ले जाता। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं था, यह उस ज़माने की मासूमियत, उत्साह और जीवंत संस्कृति का हिस्सा था

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तलाश

ज़िंदगी में तलाश रास्तों की नहीं, मंज़िल की होती है। इंसान कभी-कभी जीवन की भीड़ में इतना आगे बढ़ जाता है कि खुद से ही दूर हो जाता है। सुख चैन नहीं लेने देता और दुख नींद छीन लेता है, पर हम मुस्कुराते हुए सब झेलते हैं जैसे बेफ़िक्री में गुज़र रही ज़िंदगी को बस देखते जा रहे हों। असल खोज जीवनभर खुद को पाने की ही रहती है।

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पापा का क्यूट कंफ्यूज़न

इंटरनेट पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक पिता और बेटी का छोटा-सा पल लाखों चेहरों पर मुस्कान बिखेर रहा है. वीडियो में बेटी ट्रेन की खिड़की से अपने पापा को कोरियन फिंगर हार्ट बनाकर प्यार जता रही होती है. लेकिन भारतीय पिता तो पिता होते हैं… सीधे समझ बैठे कि शायद बेटी पैसे मांग रही है..

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