
डॉ. शशिकला पटेल असिस्टेंट प्रोफेसर (मुलुंड पूर्व} , मुंबई
हमको सूरज है बनना,
चाहे पड़ जाए जलना।
जग में नव प्रकाश है लाना,
अंधकार को दूर भगाना।
धरती से है पाप मिटाना,
यह प्रण हमने मन में ठाना।
हमको सूरज है बनना,
चाहे पड़ जाए जलना।
हिल-मिलकर सदा रहेंगे,
एक-दूजे के कष्ट हरेंगे।
मुश्किल से हम नहीं डरेंगे,
सदा दुखियों की मदद करेंगे।
हमको सूरज है बनना,
चाहे पड़ जाए जलना।
हम तूफानों से लड़ जायेंगे,
पर्वत चीर के बढ़ जायेंगे।
दुश्मन को मार गिरायेंगे,
शांति की नगरी बसायेंगे।
हमको सूरज है बनना,
चाहे पड़ जाए जलना।