
शावर भकत ‘भवानी ‘
अंजन, बर्तन, व्यंजन, कंगन, पूजन में,
माँ ही दिखेंगी रोज़ाना घर-आँगन में।
ज़ाहिर है कि बोझिलपन या उलझन में,
सुलझन मिलती है माँ के अपनेपन में।
जब भी घर से बाहर जाते हैं बच्चे,
तब माँ ही दिखती है रोली-चंदन में।
यादों के पट खोलोगे तो माँ अक्सर,
चावल चुनती दिख जाएँगी आँगन में।
दूर भला कब जाती है माँ बच्चों से,
बनकर दुआ वह रहती है हर पूजन में।
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