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माँ घर के आँगन में चावल चुनती हुई

माँ ही दिखेंगी रोज़ाना घर-आँगन में

माँ केवल घर में मौजूद एक रिश्ता नहीं, बल्कि घर-आँगन की हर स्मृति और हर दुआ में बसी एक भावना है। यह कविता माँ की ममता और अपनेपन को शब्द देती है।

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