
नीलम पेड़ीवाल, जमशेदपुर (झारखण्ड)
1)कुंज बिहारी की सदा,
महिमा अपरम्पार।
पूरी करते कामना,
यह जीवन का सार।।
2) संग गोपियाँ राधिका,
कृष्ण रचाते रास।
कल-कल कालिंदी करें,
देखो जाकर पास।।
3) मुख माखन लिपटा दिखा,
चकित हुई थी मात।
संग कृष्ण के गोपियाँ
खेल रहीं दिन -रात।।
4) मुकुट भाल सोहे सदा,
घुँघराले हैं बाल
शोभा बड़ी सुहावनी,
निरखूँ मैं हर साल।।
