मोर मुकुट धारण किए भगवान श्रीकृष्ण, हाथ में बांसुरी, वृंदावन के कुंजों में राधा और गोपियों के साथ दिव्य रासलीला का मनमोहक दृश्य।

श्री कृष्ण

ज बिहारी श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा, राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और वृंदावन की रासलीला का सुंदर काव्यात्मक चित्रण। माखनचोर नंदलाल की बाल लीलाओं से लेकर उनके मनमोहक स्वरूप तक, यह कविता भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद का मधुर संदेश देती है। श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और समर्पण से ओतप्रोत यह रचना भक्तों के हृदय को भाव-विभोर कर देती है।

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कृष्ण के अनेक रूप: भक्ति कविता

रूप एक नाम अनेक

यह कविता भगवान कृष्ण के अनेक दिव्य रूपों और लीलाओं का भावपूर्ण चित्रण करती है, जिसमें बाल्यकाल की नटखटता से लेकर धर्म और कर्म का उपदेश देने वाले सारथी रूप तक उनकी अनंत महिमा को दर्शाया गया है.

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कृष्ण तुम ही हो…

कवि कृष्ण को सबमें और सब कुछ कृष्ण में देखता है। वे ज्ञान भी हैं और विज्ञान भी, वेद भी हैं और उपदेश भी। प्रकृति में बहती सरिता से लेकर सागर की गहराइयों तक, पेड़-पौधों की हरियाली से लेकर धरती की मुस्कान तक हर रूप में कृष्ण विराजते हैं। वे काल भी हैं और भाव भी, प्रेम की ज्वाला भी और विरह की पीड़ा भी। कभी मरहम बनकर सहलाते हैं तो कभी प्रेरणा बनकर दिशा दिखाते हैं। भजन-किर्तन में गूंजते स्वर हों या संसार की माया सब कृष्ण ही हैं, तारणहार भी वही।

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