
नवनीत कमल, जगदलपुर (छत्तीसगढ़)
लक्ष्य जीवन का बताया,
कर दिया उपकार तुमने।
दे दिया प्रारब्ध में ही,
दर्द का संसार तुमने।।
शब्द मधुरिम दिख रहे हैं,
भाव में संताप देखूँ।
शून्य में कुछ खो गया है,
प्राण का आलाप देखूँ।
गीत में नव राग भरकर
दे दिया उपहार तुमने।।
बह गए हैं आँसुओं में,
मोती अनमोल सारे।
व्यर्थ सब अवधारणाएँ,
प्रेरणा के शब्द हारे।
फूल भी चुभने लगे हैं
भर दिया क्यों खार तुमने।।
हौसलों की जिद के आगे,
हार का औचित्य झूठा।
कर्म को आराध्य माना,
स्वार्थ से संपर्क रूठा।
राह के कंटक हटाकर
कर दिया सत्कार तुमने।।
राह में जब तम घना था,
दीप जगमग-जगमगाए।
देखती हूँ अब उजाला,
जिंदगी कुछ गुनगुनाए।
वेदनाएँ सह गई हूँ
कर दिया है उद्धार तुमने।।
लेखिका के बारे में-
श्रीमती नवनीत कमल
समकालीन हिंदी साहित्य की संवेदनशील एवं सशक्त रचनाकार हैं, जिनकी लेखनी में मानवीय संवेदनाएँ, जीवन-दर्शन और सामाजिक सरोकारों की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती है। 28 फरवरी को जन्मी नवनीत कमल ने हिंदी साहित्य एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर तथा बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘स्मृतियों के मृग’ (2020), ‘एक नदी सा मन’ (2023), ‘ताड़ वनों के बीच’ (2023), ‘रोशनी से भर गया मन’ (2025) तथा ‘पद्म पयोधि’ (2026) शामिल हैं। 16 साझा संकलनों में सहभागिता के साथ उनकी रचनाएँ राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। संपादन, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से जुड़ाव, संगोष्ठियों और काव्य-पाठ में सक्रिय सहभागिता ने उनके साहित्यिक व्यक्तित्व को समृद्ध किया है। उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान सहित अनेक साहित्यिक और शैक्षणिक सम्मानों से सम्मानित नवनीत कमल वर्तमान में शिक्षा विभाग में व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं।उनकी लेखनी संवेदना, संस्कार और सृजनशीलता की ऐसी उजली धारा है, जो पाठकों के मन को गहराई से स्पर्श करती है।
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मेरी रचना को आपके इस प्रतिष्ठित वेबसाइट में स्थान देने के लिए हृदय तल से आपका आभार 🙏