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नागफनी सी बेटियां !

रेगिस्तान में खड़ी एक लड़की के पीछे नागफनी का पौधा, समाज में बेटियों के दर्द का प्रतीकात्मक दृश्य

वर्षा गर्ग, मुंबई

लड़कों की चाह में जबरन
पैदा की जाती रही लड़कियां
बदल जाती हैं नागफनी के रूप में।

भीतर से मांसल, स्निग्धता से लबालब,
अपने चारों ओर कांटे छितराए।
इन्हें बर्दाश्त नहीं होती कोमल छुअन,
कड़वाहट और तीक्ष्णता स्थायी भाव हैं इनके।

धूप, हवा, बारिश रहती है बेअसर,
बढ़ा करती हैं बेढब, बेतरतीब सी।
नहीं ढूंढती कोई मजबूत सहारा,
लिपटी रहती हैं इर्द-गिर्द अपने ही।

और जब तैतर बेटी के बाद
जन्मता है कोई भाई, उस पल
सह नहीं पाती भाग्यशाली कहलाना।

औरों की आँखों में दिखता दुलार
भर देता है इनकी आँखों को।
अपने ही आँसुओं की नमी से
ये अपने आप पिघल जाती हैं।

हाँ! देखा है मैंने कई बार कुछ लड़कियों को,
जो जन्म लेते ही नागफनी में बदल जाती हैं।

6 thoughts on “नागफनी सी बेटियां !

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