अस्तित्व

ऑटो चालक पिता के बेटे के कलेक्टर बनने पर भावुक दृश्य, झोपड़ी के सामने भीड़ और गर्व से भरा पिता

मधु मिश्रा कोमना, नुआपड़ा, ओडिशा

” का हुआ रे संध्या आज बंसी की झोपड़ी में इतने सारे लोग काहे भीड़ लगाये हुए हैं?” जानकी काकी ने विस्मयपूर्वक कहा I

“अरे काकी तुम्हें नहीं मालूम क्या, बंसी का बेटा कलेक्टर की परीक्षा में पास हुआ है!” गर्वीले भाव से संध्या बोली I

” सच्ची में .. चलो बढ़िया हुआ बंसी की तपस्या पूरी हो गई रे.. I बेचारा दिन-दिन भर ऑटो चलाता रहा, बेटे की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी उसने! अकेला माँ-बाप बनकर पाला है अपने बेटे को.. बंसी का तो सीना चौड़ा कर दिया बेटे ने I “

” सच कह रही हो काकी, ऐसे बच्चे बड़े नसीब से मिलते हैं .. जानती हो काकी, मीडिया वाले जब उससे पूछे कि तुम्हारी इस सफ़लता का श्रेय किसे देना चाहते हो ? तो वो बोला – मेरे बाउजी को ही दूँगा I क्योंकि कोई भी फूल या फल की पहचान उस पेड़ से ही तो होती है I पेड़ यदि अपनी पूरी ऊर्जा न लगाये तो उसमें फल या फूल भी नहीं होगा? बेटे की बात सुनकर बंसी के आँसू धार-धार बह रहे थे I और बंसी की बात सुनकर भीड़ में खड़े सारे लोग ताली बजा रहे थे.. I “

लेखिका के बारे में
मधु मिश्रा
समकालीन हिंदी साहित्य की एक सशक्त और संवेदनशील रचनाकार हैं, जिनकी लेखनी मानवीय भावनाओं, सामाजिक यथार्थ और स्त्री मन की गहराइयों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करती है। ओडिशा के नुआपाड़ा ज़िले से संबंध रखने वाली मधु जी ने एम.ए. समाजशास्त्र (स्वर्ण पदक) एवं एम.फिल. की उच्च शिक्षा प्राप्त की है, जिसका स्पष्ट प्रभाव उनके चिंतन और लेखन में परिलक्षित होता है। कहानी, लघुकथा, कविता, हाइकु और आलेख जैसी विविध विधाओं में उनकी सक्रिय उपस्थिति है। वर्ष 2001 से उनकी रचनाएँ देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं। उनका लघुकथा संग्रह “धूप के पाँव” तथा कहानी संग्रह “ड्रीम गर्ल” विशेष रूप से चर्चित रहे हैं, जिनका विमोचन विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में हुआ। मधु मिश्रा की रचनात्मक यात्रा अनेक साझा काव्य, कहानी और लघुकथा संकलनों से समृद्ध है। साहित्य संगम, नारी अस्मिता, हिन्दी भाषा डॉट कॉम सहित कई संस्थाओं द्वारा उन्हें विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है।वर्तमान में वे लेखन के साथ-साथ कथा नैरेशन के माध्यम से भी साहित्य को जीवंत रूप में पाठकों और श्रोताओं तक पहुँचा रही हैं। उनकी लेखनी संवेदना, सरोकार और सृजनशीलता का सुंदर संगम है।

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3 thoughts on “अस्तित्व

  1. आपकी लेखनी में जादू है। आपने जिस तरह से शब्दों को पिरोया है, वह सीधे दिल में उतर जाता है। भावों की इतनी गहरी और खूबसूरत अभिव्यक्ति मैंने बहुत कम देखी है। लिखने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
    मैने आपकी सारी कहानी और लेख का पाठन किया है।

      1. आदरणीय मधुजी
        आपने अन्य रचनाकारों की रचनाओं पर अपनी टिप्पणी देकर जो प्रेम और स्नेह प्रदर्शित किया है. वह सचमुच आपको महान बनाता है.

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