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एक दिन यूं ही !!

आक्रोश और बेचैनी को शब्दों में व्यक्त करती हुई कलम और हिंदी कविता

अलका ‘सोनी’ बर्नपुर (पश्चिम बंगाल)

एक दिन यूं ही

पूछ बैठी कलम से

कैसी हो ?

क्या चल रहा है, क्या अब भी

रक्त खौलता है तुम्हारा ?

और भीतर ही भीतर

क्या कुछ डबकता है वैसा ही?

हो गई वो अब गंभीर कुछ

देखा उसने मुझे घूरकर….

जैसे लिया हो मैंने क्या पूछ!!

बोली, हां खौलता है

अब भी खून मेरा,

रोष डबकता है

अंदर ही अंदर मेरे ,

सोचती हूं मैं ये कितनी बार ही

कि लिख दूं अबकी

इस पार या फिर

बस उस पार ही ….

शब्दों के उगलने के अलावा

और क्या बचा है अब हथियार ही !!

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5 thoughts on “एक दिन यूं ही !!

  1. अपने मन के भाव से
    कलाम के एहसासों का
    बहुत सुंदर चित्रण किया आपने।
    हार्दिक बधाई आपको ✍️💐

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