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आक्रोश और बेचैनी को शब्दों में व्यक्त करती हुई कलम और हिंदी कविता

एक दिन यूं ही !!

जब भीतर का रोष शब्दों में उबलने लगे और कलम ही अभिव्यक्ति का आखिरी हथियार रह जाए, तब कविता जन्म लेती है. ‘एक दिन यूं ही’ इसी बेचैनी और आक्रोश की मार्मिक अभिव्यक्ति है.

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