पिता का प्रेम
पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की नींव, विश्वास का स्तंभ और त्याग का दूसरा नाम हैं। प्रस्तुत है पिता के प्रेम, संघर्ष और समर्पण को समर्पित एक हृदयस्पर्शी कविता।

पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की नींव, विश्वास का स्तंभ और त्याग का दूसरा नाम हैं। प्रस्तुत है पिता के प्रेम, संघर्ष और समर्पण को समर्पित एक हृदयस्पर्शी कविता।
बंगाल की चुनावी रैली एक व्यंग्यात्मक कविता है, जिसमें चुनावी नारों, राजनीतिक टकराव, जनभावनाओं और बंगाल की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को रोचक एवं मंचीय अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है।
स्वर्णिम प्रभात की सुनहरी किरणों से आलोकित यह कविता प्रकृति के अनुपम सौंदर्य, पक्षियों के मधुर कलरव, उषा की मनोहारी लालिमा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह रचना प्रकृति के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और संरक्षण की भावना जागृत करती है।
प्राण प्रतिष्ठा” एक गहन प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें देह, आत्मा, यथार्थ और तन्हाई के बीच संघर्ष को सशक्त बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। यह रचना मनुष्य के अस्तित्व, आत्मबोध और भीतर सुलगती मौन पीड़ा की मार्मिक पड़ताल करती है।
“सिंदूर तेरे नाम का” प्रेम, विश्वास और आजीवन समर्पण की भावनाओं को व्यक्त करती एक भावपूर्ण हिंदी कविता है। इसमें जीवनसाथी के साथ जन्म-जन्मांतर के बंधन, अटूट विश्वास और साथ निभाने की कामना को कोमल शब्दों में पिरोया गया है। कविता भारतीय वैवाहिक संस्कृति में सिंदूर के आध्यात्मिक और भावनात्मक महत्व को भी सुंदरता से अभिव्यक्त करती है।
एक शहीद सैनिक की बेटी की दृष्टि से लिखी गई यह हृदयस्पर्शी कविता पिता के बलिदान, माँ के दुःख और एक बेटी के अधूरे स्नेह की कहानी कहती है। “मैं पापा की नन्ही परी” पाठकों की संवेदनाओं को गहराई से छू लेने वाली रचना है।
राधा और कृष्ण के इस काव्य-संवाद में प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मिक एकत्व और समर्पण की अनुभूति बनकर सामने आता है—जहाँ दो अस्तित्व मिलकर राधाकृष्ण हो जाते हैं