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रात के शांत वातावरण में अकेली स्त्री, चाँदनी और स्मृतियों में डूबी भावनात्मक अनुभूति का दृश्य।

स्मृति और… तुम!

स्मृति और… तुम!’ प्रेम और अनुपस्थिति के सूक्ष्म भावों को गहरी संवेदना के साथ अभिव्यक्त करती कविता है। स्मृतियों की नमी, इंतज़ार की सीलन और भीगे सन्नाटे के बीच यह रचना बताती है कि प्रेम को अंत तक ढोने के लिए शब्द नहीं, स्मृति चाहिए।

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मशाल थामे साथ दौड़ते लोग, एकता और सामूहिक सफलता का प्रेरक दृश्य।

अहं नहीं, वयं सत्य!

यह कविता ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा को दर्शाती है। अहंकार, प्रतिस्पर्धा और आत्ममुग्धता के बीच सहयोग, मशाल सौंपने और साथ मिलकर मंज़िल पाने का गहरा संदेश देती है।

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सूर्योदय की ओर बढ़ता व्यक्ति, संघर्ष और सफलता का प्रतीक प्रेरणादायक दृश्य।

अगर…

यह प्रेरणादायक कविता जीवन के संघर्ष, मेहनत, हार-जीत और आत्मविश्वास का संदेश देती है। सफलता पाने के लिए धैर्य, परिश्रम और निरंतर प्रयास की आवश्यकता को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है।

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विवाह के प्रतीकात्मक वातावरण में एक भारतीय माँ अपनी बेटी का हाथ थामे खड़ी है, जो आत्मसम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्र पहचान का संदेश देती है।

मेरी बेटियों

“मेरी बेटियों” केवल विवाह पर लिखी कविता नहीं, बल्कि बेटियों के आत्मसम्मान, स्वतंत्र पहचान और रिश्तों में गरिमा की बात करने वाली संवेदनशील अभिव्यक्ति है। यह कविता कन्यादान, सामाजिक अपेक्षाओं और समझौते की सीमाओं पर प्रश्न उठाते हुए बेटियों को यह संदेश देती है कि किसी भी रिश्ते से पहले उनका जीवन और सम्मान महत्वपूर्ण है।

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विरह में डूबी एक स्त्री, दूर जाती परछाईं को निहारती हुई, आँखों में प्रेम और प्रतीक्षा का गहरा भाव।

नज़र से जुदा

कुछ लोग नज़रों से दूर हो जाते हैं, मगर दिल से नहीं। यह कविता उसी विरह, स्मृति और लौट आने की उम्मीद का गीत है, जहाँ प्रेम जुदाई के बाद भी सांस लेता रहता है।

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तेरे होने और मेरे न होने के बीच | एक प्रेम कविता

तेरे होने, मेरे न होने के बीच

कुछ रिश्ते नाम से नहीं, एहसासों से जिए जाते हैं। यह कविता प्रेम, स्मृतियों, आगोश और उस अनकहे खालीपन की कहानी है, जहाँ “तेरे अलावा” और “तेरे बिना” एक साथ सांस लेते हैं।

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घर में महसूस होती माँ की उपस्थिति और ममता को दर्शाती भावनात्मक हिंदी कविता का दृश्य

शायद माँ आयी है

‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।

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नारी के मौन, संघर्ष और आत्मसम्मान को दर्शाती भावनात्मक हिंदी कविता का दृश्य

मौन

‘मौन’ स्त्री जीवन की उस पीड़ा और संघर्ष की कविता है, जहाँ सदियों से लादी गई अपेक्षाएँ, रिश्तों के बोझ और पहचान की तलाश एक तीखा प्रश्न बनकर उभरते हैं। यह कविता नारी की चुप्पी नहीं, उसके भीतर के प्रतिरोध और आत्मसम्मान की आवाज़ है।

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युवा पीड़ा, सामाजिक निराशा और भीतर के शोर को दर्शाती भावनात्मक हिंदी कविता का दृश्य

पंगु

‘पंगु’ केवल एक कविता नहीं, बल्कि भीतर दबे शोर, सामाजिक विडंबना, युवा असंतोष और व्यवस्था पर तीखा प्रश्न है। इसमें बेरोजगारी, टूटते सपने, स्त्री असुरक्षा और राजनीतिक वादों के बीच जूझती पीढ़ी की बेचैनी मुखर होकर सामने आती है।

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