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सोफे पर साथ बैठी माँ और बेटी का भावुक चित्र, माँ को समर्पित हिंदी कविता का दृश्य।

मैं परछाईं माँ की

“मैं परछाईं माँ की” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें माँ के संघर्ष, संस्कार, प्रेम और आशीर्वाद को बेटी की भावनाओं के माध्यम से खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।

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तिलमिलाहट: जब संस्कारों की आड़ में छिपा सच सामने आया

तिलमिलाहट

जब एक परिवार में संस्कारों की दुहाई दी जाती है, तभी एक ऐसा सच सामने आता है जो उन सभी मूल्यों को झकझोर देता है। “तिलमिलाहट” एक ऐसी कहानी है जो समाज के दोहरे चेहरे को बेनकाब करती है।

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माँ तेरा आँचल – हृदयस्पर्शी हिंदी कविता

माँ तेरा आँचल…

‘माँ तेरा आँचल’ कविता माँ के स्नेह, ममता और सुरक्षा के उस भावलोक को चित्रित करती है जहाँ आँचल ही संसार बन जाता है। यह रचना बचपन की स्मृतियों और मातृत्व की गरिमा को सरल शब्दों में जीवंत कर देती है।

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म्मा: दादी की यादों, संस्कारों और ममता पर भावुक कविता

अम्मा

अम्मा” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो दादी की ममता, संस्कार और बचपन की यादों को सहेजती है. 2010 के बाद के अकेलेपन और भावनात्मक रिक्तता को यह रचना बेहद संवेदनशील ढंग से व्यक्त करती है.

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नानी के गाँव में चूल्हे पर रोटी बनाती दादी और नीम की छाँव में खेलते बच्चे

याद आता है पुराना जमाना

यह कविता बचपन की उन सरल और सच्ची यादों को जीवंत करती है, जब नानी का गाँव, चूल्हे की रोटी, नीम की छाँव, पाठशाला के संस्कार और बिजली जाने पर चिमनी की रोशनी जीवन का हिस्सा थे। “याद आता है पुराना जमाना” सिर्फ स्मृतियों का वर्णन नहीं, बल्कि उस सादगी, अपनापन और संस्कारों की दुनिया की भावनात्मक पुनर्स्मृति है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कहीं पीछे छूट गई है।

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जन्मदिन पर परिवार के साथ खुश बच्चा, संस्कार और सादगी का संदेश

जन्मदिन की सौगात

यह बाल कविता जन्मदिन के उत्सव को केवल केक और उपहारों तक सीमित न रखकर, उसे संस्कार, सेवा और करुणा से जोड़ती है। पेड़ लगाना, पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम, बड़ों का सम्मान और सादगीपूर्ण जीवन जैसे मूल्य इस रचना को बच्चों के लिए शिक्षाप्रद और प्रेरक बनाते हैं।

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भारतीय विवाह में पारंपरिक परिधान में सजी दुल्हन

विवाह गीत

यह विवाह गीत भारतीय लोक परंपरा की मिठास लिए हुए है, जहाँ शुभ दिन का उत्सव, घर-आंगन की सजावट, ढोलक की थाप और बेटी की विदाई के भाव एक साथ पिरोए गए हैं। गीत में न केवल आनंद और मंगलकामनाएँ हैं, बल्कि बेटी के नए जीवन के लिए आशीर्वाद, संस्कार और स्नेह की कोमल अभिव्यक्ति भी है।

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एक भारतीय माँ सुबह के धुंधलके में घर के दरवाज़े पर खड़ी, दूर जाते बेटे को स्नेह और उम्मीद भरी आँखों से देखते हुए.

तुम सपने ज़रूर देखना…

यह कविता सपनों के माध्यम से माँ और संतान के रिश्ते की उस गहराई को छूती है, जहाँ प्रेम स्वार्थ नहीं बल्कि त्याग बन जाता है. महानगर की चकाचौंध के बीच यह रचना याद दिलाती है कि असली ऊर्जा माँ की आँखों में छुपी होती है, और सपनों का सच होना तभी सार्थक है जब उसमें उसकी साँसें बाकी रहें.

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दिल पिघल गया

नन्ही रवनीत ने अपने अतिरिक्त जूते सहपाठी खुशी को देकर यह सिखा दिया कि संस्कार केवल शब्द नहीं होते, वे संवेदना बनकर जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान भी बनते हैं।

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माँ तो माँ होती है…

माँ का साथ शब्दों का मोहताज नहीं होता। कभी वह धूप में छाता बन जाती है, तो कभी जीवन की भीड़ में सहारा। उम्र भले ही शरीर पर अपना असर छोड़ दे, पर माँ की मौजूदगी वही सुकून देती है. निःशब्द, निःस्वार्थ और पूरी तरह सुरक्षित। माँ के साथ बिताया हर पल स्मृति बनकर जीवन भर साथ चलता है

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