माँ होना ही कठिन लगा
माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।

माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।
मुंबई के पॉश इलाके में समुद्र के किनारे बना “रत्नालय” दूर से किसी महल जैसा दिखाई देता था। ऊँची दीवारें, चमचमाती काँच की खिड़कियाँ, विदेशी गाड़ियाँ और हर समय आने-जाने वाले लोगों की भीड़—ये सब कुछ उस आलीशान घर की हैसियत बयान करती थीं।
पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की नींव, विश्वास का स्तंभ और त्याग का दूसरा नाम हैं। प्रस्तुत है पिता के प्रेम, संघर्ष और समर्पण को समर्पित एक हृदयस्पर्शी कविता।
“एकांत का शोर” एक मार्मिक कहानी है जो पिता के निधन के बाद माँ के जीवन में पसरे अकेलेपन और बेटे की व्यस्तता के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी को चित्रित करती है। जब बेटा अपनी माँ को आधी रात अपनी तस्वीर को सीने से लगाकर लोरी सुनाते हुए देखता है, तब उसे एहसास होता है कि सफलता की दौड़ में उसने सबसे अनमोल रिश्ते को अनदेखा कर दिया है।
क़तर में अकेली ज़िंदगी जी रही मान्या परिवार की जिम्मेदारियों के बीच खुद को भूल चुकी थी। तन्हाई, पुराने प्रेम की स्मृतियाँ और नए रिश्ते के डर के बीच जब जीवन ने उसे प्रेम का दूसरा अवसर दिया, तब उसे समझ आया कि चलते रहने का नाम ही ज़िंदगी है।
पति-पत्नी के रिश्ते में तुलना, अपनापन और प्रेम की हल्की नोकझोंक को बयां करती यह भावनात्मक हिंदी लघुकथा बताती है कि हर रिश्ता अपनी अलग पहचान चाहता है।
‘दूरी की पहली आहट’ एक भावनात्मक लेख है जो रिश्तों में धीरे-धीरे बढ़ती दूरी, बदलते व्यवहार और भीतर जन्म लेती बेचैनी को गहराई से उकेरता है। यह कहानी उन अनकहे पलों की है, जब रिश्ता टूटता नहीं, बस धीरे-धीरे दूर होने लगता है।