इश्क़, दर्द और खामोशी
ह ग़ज़ल इश्क़, दर्द और तन्हाई की गहरी भावनाओं को बयां करती है। टूटे हुए दिल, अधूरे ख़्वाब और यादों के सहारे जीने की पीड़ा को बेहद खूबसूरती से शब्दों में पिरोया गया है।

ह ग़ज़ल इश्क़, दर्द और तन्हाई की गहरी भावनाओं को बयां करती है। टूटे हुए दिल, अधूरे ख़्वाब और यादों के सहारे जीने की पीड़ा को बेहद खूबसूरती से शब्दों में पिरोया गया है।
यह ग़ज़ल टूटे दिल, अधूरी उम्मीदों और बेवफाई के गहरे दर्द को बयां करती है। हर शेर उस पीड़ा को छूता है, जहाँ अपना ही इंसान अजनबी बन जाता है। यह रचना उन अनकहे जज़्बातों की आवाज़ है, जिन्हें शब्दों में कहना आसान नहीं होता।
यह ग़ज़ल यादों की उस नरम आहट को पकड़ती है, जो कभी चुपचाप दिल में उतर जाती है और फिर उम्रभर साथ रहती है। इसमें मोहब्बत के वो पल हैं, जो पूरे होकर भी अधूरे रह जाते हैं. नज़रों का झुकना, लबों का काँपना और मिलने से ज़्यादा बिछड़ने की कसक। हर शेर में एक ऐसी तन्हाई है, जो सिर्फ महसूस की जा सकती है, बयान करना आसान नहीं।
यह रचना बताती है कि कभी-कभी जीवन के कठिन क्षणों में एक निर्जीव वस्तु भी हमारा सबसे बड़ा सहारा बन जाती है।
टूटते तारे से मांगी गई एक मन्नत और उसके बाद आई खबर यह कहानी इश्क, इंतजार और किस्मत की कड़वी सच्चाई को बयां करती है।
वह ख्यालों में बार-बार आता रहा कभी याद बनकर सुलाता, कभी कसक बनकर रुलाता। कभी ज़ख़्मों पर मरहम था, तो कभी दिल की आग। साँसों में उसकी महक थी, बारिश की तरह वह बरसता रहा। जब दिल के दरवाज़े खुले, तो वही धड़कन बनकर बस गया। समय बेरहम था, इश्क़ पर परदा रहा और मैं, हर टूटन के बाद भी उसी को महसूस करती रही।
वह मुझसे नहीं, मेरे वजूद के सिर्फ एक छोटे से अंश से प्यार कर बैठा। उसे शायद अंदाज़ा भी नहीं कि मेरे बाकी हिस्सों में कितनी कहानियाँ, कितने घाव और कितनी चुप्पियाँ दबी पड़ी हैं। मेरी हँसी के पीछे छुपे आँसू, मेरे सुकून के पीछे की बेचैनी, और मेरी तन्हाइयों के पीछे की चीखें ये सब उसकी समझ से बहुत दूर हैं।
ज़िंदगी ने बस इतना ही सिखाया है कि इंतज़ार भी एक उम्र माँगता है। न जाने कितनी रातें, कितने दिन तेरी याद में गुज़र गए। खामोशी बहुत कुछ कहती है, पर जब दिल नहीं समझ पाता, मैं फ़िज़ाओं के बीच आकर तेरे दीदार की आस लगा बैठता हूँ। अब तो ये हवाएँ भी थकी-सी लगती हैं .मानो ये भी चाहती थीं कि एक दिन मेरी खामोशी मुस्कान में बदल जाए।
हर रात एक ही इंतज़ार स्क्रीन पर उसका ऑनलाइन दिखना। बातों में कुछ ख़ास नहीं, पर उस हरी बत्ती के पीछे जैसे एक रिश्ता साँस लेता है। उसकी हर “गुड मॉर्निंग” कमरे की ख़ामोशी में रोशनी भर देती है, और मैं फिर अगले इंतज़ार में डूब जाता हूँ।