Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
रात के समय महल से जाते बुद्ध, पीछे यशोधरा गोद में राहुल को लिए दुख और धैर्य के साथ खड़ी हैं।

पुनर्जन्म

‘पुनर्जन्म’ एक विचारोत्तेजक कविता है जो बुद्ध के संन्यास और यशोधरा के मौन त्याग के बीच स्त्री जीवन के अनकहे संघर्ष को उजागर करती है। यह कविता समाज की दोहरी मानसिकता पर गहरा प्रश्न उठाती है।

Read More
भारत में रोटी के लिए लाइन में खड़े अमीर और गरीब लोग, भूख और जीवन संघर्ष को दर्शाता भावुक यथार्थवादी दृश्य।

सब लोग तेरे दीवाने

“सब लोग तेरे दीवाने” एक संवेदनशील हिंदी कविता है, जो रोटी के महत्व और भूख की पीड़ा को गहराई से व्यक्त करती है। यह कविता बताती है कि अमीर हो या गरीब, हर इंसान की पहली जरूरत रोटी ही है। जीवन के संघर्ष, इच्छाओं और हालातों के बीच रोटी की तलाश कभी खत्म नहीं होती। कवि ने सरल शब्दों में समाज की वास्तविकता, गरीबी और मानवीय जरूरतों को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कविता पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि रोटी केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।

Read More
रेगिस्तान में खड़ी एक लड़की के पीछे नागफनी का पौधा, समाज में बेटियों के दर्द का प्रतीकात्मक दृश्य

नागफनी सी बेटियां !

यह कविता बेटियों के प्रति समाज में मौजूद भेदभाव और उपेक्षा की मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत करती है। नागफनी के प्रतीक के माध्यम से दिखाया गया है कि प्रेम और स्वीकार्यता से वंचित लड़कियां भीतर से कोमल होते हुए भी परिस्थितियों के कारण कठोर बन जाती हैं।

Read More
आत्मविश्वास से भरी महिला, आईने के सामने खड़ी, अपनी पहचान और सच्चाई को दर्शाती हुई

कविता हूँ मैं

कविता हूँ मैं’ एक सशक्त और बेबाक रचना है, जो स्त्री के आत्मसम्मान, पहचान और सच को उजागर करती है। यह कविता समाज की संकीर्ण सोच पर तीखा प्रहार करते हुए खुद को आईने की तरह प्रस्तुत करती है, जो सच्चाई को ज्यों का त्यों दिखाती है।

Read More
कनॉट प्लेस में रंग-बिरंगे पंखे बेचती एक छोटी लड़की, मासूम आंखों और श्रम से भरी हथेलियों के साथ

वो लड़की

‘वो लड़की’ कविता एक मासूम बच्ची के संघर्ष, श्रम और सपनों को बेहद संवेदनशीलता से चित्रित करती है। उसकी छोटी-सी दुनिया में छिपी बड़ी संभावनाएं और भावनाएं पाठक को गहराई से छू जाती हैं, और समाज की सच्चाई को उजागर करती हैं।

Read More
“प्रजातंत्र का प्रतीक वन दृश्य”

एक कविता लिखूँगी…

यह कविता जंगल के रूपक के माध्यम से प्रजातंत्र और सत्ता परिवर्तन की गहरी सामाजिक व्याख्या प्रस्तुत करती है। इसमें हिंसक और शक्तिशाली जीवों के स्थान पर शांतिप्रिय और संवेदनशील जीवों को सत्ता सौंपने की कल्पना की गई है। यह केवल एक काल्पनिक बदलाव नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संतुलन की आवश्यकता को दर्शाता है। कविता यह संदेश देती है कि जब भय और शोषण पर आधारित व्यवस्था समाप्त होती है, तब ही वास्तविक प्रजातंत्र स्थापित हो सकता है।

Read More
गहनों की बेड़ियों में बंधी हुई एक महिला, जो समाज में नारी की स्थिति और संघर्ष को दर्शाती है

अधूरी पहचान

“नारी का अस्तित्व बस इतना सा…” कविता समाज में नारी की वास्तविक स्थिति और उसके संघर्षों को उजागर करती है। यह रचना दर्शाती है कि कैसे नारी को कभी देवी तो कभी दासी बनाकर उसके अधिकारों को सीमित किया गया। यह कविता नारी सम्मान, समानता और सशक्तिकरण का गहरा संदेश देती है।

Read More
लाल टेशू के फूलों से लदे पेड़ की डाल पर बैठी एक अकेली स्त्री की परछाईं, पृष्ठभूमि में धुंधला बियाबान जंगल

उसने चाहा प्रेम…

यह कविता स्त्री की उन अधूरी इच्छाओं की कहानी कहती है जिन्हें समाज ने अपराध, पाप या विद्रोह घोषित कर दिया। प्रेम, सौंदर्य, आध्यात्म और स्वतंत्रता की चाह रखने वाली स्त्री हर मोड़ पर दंडित होती रही लेकिन अंततः वह अपनी ही आग में एक नई सत्ता बनकर उभरती है।

Read More
मिट्टी के पात्र में रखा पानी पीती हुई प्यास से व्याकुल छोटी चिड़िया

चिड़िया प्यासी है…

यह कविता “चिड़िया प्यासी है” जल संरक्षण और जीवदया का मार्मिक संदेश देती है। बदलते पर्यावरण और घटती चिड़ियों की संख्या के बीच यह रचना हमें याद दिलाती है कि पक्षियों के लिए पानी रखना भी एक बड़ी सेवा है।

Read More
सड़क पर घायल व्यक्ति की मदद करता हुआ संवेदनशील इंसान

मानवता..

यह कविता मानवता को एक जीवंत स्वर में प्रस्तुत करती है—जो कभी समाज की आत्मा थी, आज उपेक्षा और कठोरता के बीच संघर्ष कर रही है। फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी मानवता को अपने कर्म, साहस और संवेदना से जीवित रखे हुए हैं। यह रचना पाठक को याद दिलाती है कि मानवता के बिना संसार का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

Read More