जहाँ शब्द नहीं थे, वहाँ माही थी…
माही कोई साधारण लड़की नहीं थी।वह शब्दों से पहले सिसकियाँ समझती थी।घायल पशु हों या खामोश इंसान उसका मन हर पीड़ा पर ठहर जाता।
संवेदनाएँ उसकी कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं।

माही कोई साधारण लड़की नहीं थी।वह शब्दों से पहले सिसकियाँ समझती थी।घायल पशु हों या खामोश इंसान उसका मन हर पीड़ा पर ठहर जाता।
संवेदनाएँ उसकी कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं।
करवा चौथ: केवल व्रत नहीं, यह पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह त्योहार महिलाओं को अपने परिवार और जीवनसाथी के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगने का अवसर देता है। नवविवाहित हों या अनुभवी, हर महिला के लिए यह व्रत रिश्तों में मधुरता और जीवन में सुकून लेकर आता है।
गुरुकुल मानस एकेडमी की छात्रा अंशिका मालवीय ने 12वीं में 89.6% अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। उनकी यह सफलता मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है, जो अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।
महिदपुर रोड में जैन समाज ने वैशाख सुदी ग्यारस पर शासन स्थापना दिवस मनाते हुए श्री सुविधिनाथ जैन मंदिर में शासन ध्वज फहराया और सामूहिक आराधना की।
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच सहारनपुर के किसान ने बताया कि गन्ने की पैदावार से ज्यादा समस्या चीनी मिलों में समय पर भुगतान नहीं मिलने की है. किसान अब गन्ने से गुड़ और शक्कर बनाकर बेहतर कीमत और तत्काल भुगतान हासिल कर रहे हैं.
हिन्दी हमारे जीवन का परिचय है, यह ज्ञान की अमर ज्योति है और भारत के माथे की बिंदी है। भारतीय समाज के तन, मन और जीवन में रची-बसी हिन्दी अपनेपन का सागर है। इसकी मधुर वाणी में भाषण की गूंज है और कबीर का फक्कड़पन, तुलसी का समन्वय तथा सूरदास का वात्सल्य समाया हुआ है।मीराबाई का प्रेम, जायसी का वियोग और घनानंद की पीड़ा हिन्दी की संवेदनाओं में झलकती है। जयशंकर प्रसाद के आँसू, निराला का संघर्ष, पंत का परिवर्तन और महादेवी का रहस्यवाद इसमें जीवन का विस्तार पाते हैं।
महिदपुर रोड में महावीर जन्म कल्याणक पर भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर नगर को भक्ति में सराबोर कर दिया।
यह कविता एक आत्मस्वीकृति है — एक बेटी की अपनी माँ के प्रति संवेदनाओं, निरीक्षणों और अनुभवों की गहराई से उपजी भावनाओं की अभिव्यक्ति। वह कहती है कि वह अपनी माँ की खामोशी पढ़ लिया करती थी, माँ के संघर्षों और त्याग की साक्षी रही है। माँ की आँखों में छिपे दर्द, जीवन की कठोर सच्चाइयों से संघर्ष, और अपनी इच्छाओं को निस्वार्थ भाव से दबा देने का दृश्य उसने बार-बार देखा।
वह माँ की हर वह चुप्पी पहचानती थी, जिसे दुनिया अनदेखा कर देती है। माँ के आँचल से आँसू पोछने से लेकर, चाँदनी रातों में अपने दुखों से बात करने तक की हर एक लम्हा, बेटी के मन में गहरे बैठ गया।
द्रौपदी और श्रीकृष्ण के बीच यह संवाद “विश्वास का वस्त्र” महाभारत की उस पीड़ा को उजागर करता है, जहाँ नारी अस्मिता पर प्रश्न उठे। यह रचना विश्वास, धर्म, और नारी सम्मान के गहरे अर्थ को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।
सिद्धार्थ पारधे का जीवन हमें सिखाता है कि अगर इरादे मजबूत हों और सही मार्गदर्शन मिले, तो इंसान फुटपाथ से उठकर महलों तक का सफर तय कर सकता है। उनकी विनम्रता, और जमीन से जुड़े रहने की भावना उन्हें बाकी सफल व्यक्तियों से अलग बनाती हैं। उनकी कहानी कंक्रीट के जंगल में संवेदनाओं की जीत की कहानी है।