ग़ज़ल 

जब दिल के मचलते भाव किसी अक्षर को ढूँढ लेते हैं, तो उन्हें बयान करने का अंदाज़ भी खोज लिया जाता है। जिन्हें उड़ने की चाहत होती है, वे पर ढूँढ लेते हैं और ज़मीन पर रहते हुए भी अपना आसमान पा लेते हैं। बच्चे बिना समझे पराए के अंतर को भी पहचान लेते हैं। उन्हें कमजोर करना आसान नहीं होता, क्योंकि अँधेरे में भी वे अपने मार्ग को प्रकाशमान बना लेते हैं। जो अपनी किस्मत खुद लिखते हैं, उन्हें अपने प्रयास पर विश्वास होता है और अवसर अपने आप ढूँढ लेते हैं। जिनके लिए मकान पक्का हो या न हो, वे सियासत के ज्वलनशील शोले भी पार कर लेते हैं। यह शरीर मिट्टी का बना है और मिट्टी में ही लौटना है, फिर भी वे अपनी आत्मा के दूसरे रूप को खोज लेते हैं। जब तक साँस चलती है, अर्चना को भी फुर्सत नहीं होती, फिर भी कुछ पल के लिए सुकून पा लेते हैं।

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डॉ. सविता सिंह को मिला ‘हिंदी साहित्य सेवी सम्मान’

, हिंदी दिवस के अवसर पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना द्वारा आयोजित विशेष समारोह में जमशेदपुर की सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सविता सिंह ‘मीरा’ को “हिंदी साहित्य सेवी सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ द्वारा प्रदान किया गया।

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मध्य रेल द्वारा मध्य रेल वॉल कैलेंडर 2026 का विमोचन

मध्य रेल के महाप्रबंधक श्री विवेक कुमार गुप्ता ने सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को मध्य रेल वॉल कैलेंडर 2026 का विमोचन किया. इस वर्ष वॉल कैलेंडर की थीम वंदे मातरम के 150 ऐतिहासिक वर्ष रखी गई है, जिसका शीर्षक गीत से आत्मा तक, राष्ट्र को एकजुट करना है

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रंग–रंग में बसा जीवन

जीवन को रंगों ने हमेशा ही नए अर्थ और नई दिशा दी है। लाल रंग माँ की बिंदी की तरह स्नेह और खुशियों का संदेश देता है, हरा रंग धरती की हरियाली बनकर मन में शीतलता और समृद्धि का भाव जगाता है। नीला रंग आसमान की तरह मन को उड़ान और शांति दोनों देना जानता है, जबकि सफ़ेद रंग सरस्वती की पवित्रता में ज्ञान और सादगी का प्रतीक बन जाता है। भगवा रंग सनातन संस्कृति की जड़ से जोड़कर जीवन में अनुशासन और संस्कारों का उजास भरता है। हर रंग अपनी अलग महिमा लिए हुए है और हर रंग जीवन को किसी न किसी रूप में सम्पन्न और सार्थक बनाता है।

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खुशी

“खुशी की सबसे बड़ी बाधा अक्सर हम खुद होते हैं। जो बातें हमारे नियंत्रण में नहीं, उन पर सोचते रहने से नकारात्मकता हमें घेर लेती है। दिनचर्या में थोड़ा बदलाव, मनपसंद काम के लिए समय और परोपकार यही आत्मा की सबसे सच्ची खुशी है।”

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सिंदूर-खेला

पूजा पंडाल में ढोल की थाप गूँज रही थी। विसर्जन से ठीक पहले का दिन! लाल बॉर्डर की सफेद साड़ी में सजी महिलाएँ माँ दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर, एक-दूसरे की माँग और गालों पर रंग भर रही थीं।

भीड़ के बीच खड़ी रितुपर्णा बाहर से मुस्करा रही थी, मगर भीतर खालीपन था। कुछ महीने पहले पति ने शराब के नशे में घर से निकाल दिया था। अकेली रहती तो ठीक था, पर बच्चे की परवरिश? सोचकर दिल डूब जाता।

तभी उसकी नज़र पंडाल के कोने में गई—एक आदमी अपनी पत्नी पर चिल्ला रहा था। अगले ही पल गाल पर जोरदार थप्पड़! भीड़ ने देखा, पर सब चुप। औरत आँचल मसलती, आँखें झुकाए आँसू पोंछ रही थी।

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प्रयागराज: जहाँ जल भी मोक्ष का द्वार बनता है

प्रयागराज—तीर्थों का राजा, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का त्रिवेणी संगम आत्मा को छू लेने वाला अनुभव बन जाता है। यह केवल नदियों का मिलन नहीं, श्रद्धा और सनातन परंपरा की धारा है। संगम में एक डुबकी, जीवन के सभी द्वंद्वों से मुक्ति और शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। नाव की धीमी चाल, मंत्रों की गूंज और जल पर तैरते दीप—यह एक ऐसी यात्रा है, जो हृदय को भीतर तक शांत कर देती है।

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तुम और तुम्हारी यादें…

उस स्त्री की पीड़ा जो भुलाने की हर कोशिश के बावजूद स्मृतियों से मुक्त नहीं हो पाती। वादों से भरे प्रेम का अचानक टूट जाना, चुपचाप सहा गया अत्याचार और अकेलेपन में बहते आँसू—सब मिलकर एक ऐसी कहानी रचते हैं जहाँ प्रेम भले ही दूर हो जाए, पर उसकी यादें भीतर ज़िंदा रहती हैं। दूरी के बावजूद दो आत्माएँ एक-दूसरे की प्रतीक्षा में बँधी रहती हैं, जैसे एक ही परिंदे के दो पंख।

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प्रेम और विश्वास को दर्शाती हिंदी कविता – तुम राज़दां हो मेरी

मनमीत

तुम मेरे जीवन का वह विश्वास हो, जो अँधेरों में भी राह दिखाता है। जब संसार डगमगाता है, तब तुम्हारी मौजूदगी मुझे स्थिर रखती है। यह साथ किसी वचन या शपथ से बड़ा है. यह आत्मा की स्वीकृति है, जहाँ भय का कोई स्थान नहीं। तुम्हारे इश्क़ में मुझे सुकून मिला है, ऐसा सुकून जो प्रश्न नहीं करता, केवल स्वीकार करता है। हम दो शरीर नहीं, एक ही चेतना के विस्तार हैं तुम मेरी साधना हो और मैं तुम्हारी आस्था। इसी निष्कपट प्रेम में जीवन की हर कठिनाई सहज हो जाती है, और हर पथ आलोकित।

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रात के समय अपने बेटे की तस्वीर को सीने से लगाकर बैठी एक वृद्ध भारतीय माँ, अकेलेपन और मातृत्व के गहरे भावों को दर्शाती हुई।

एकांत का शोर

“एकांत का शोर” एक मार्मिक कहानी है जो पिता के निधन के बाद माँ के जीवन में पसरे अकेलेपन और बेटे की व्यस्तता के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी को चित्रित करती है। जब बेटा अपनी माँ को आधी रात अपनी तस्वीर को सीने से लगाकर लोरी सुनाते हुए देखता है, तब उसे एहसास होता है कि सफलता की दौड़ में उसने सबसे अनमोल रिश्ते को अनदेखा कर दिया है।

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