खुद को निहारना भूल गई वो..
कविता महिलाओं के अक्सर अनदेखे संघर्षों को उजागर करती है, जो हर रस्म, हर बंधन और त्यौहार निभाती हैं, फिर भी खुद की खुशियों और अपनी देखभाल के लिए समय नहीं निकाल पातीं। सुबह की भागदौड़, बच्चों को तैयार करना, टिफ़िन बनाना और घर के काम निपटाना—इन सब में वह अक्सर अपने आप को आइने में देखना भूल जाती हैं। पति, सास-ससुर और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुए हर छोटी-बड़ी बात पर ध्यान देती हैं, पर अपने लिए समय नहीं निकाल पातीं। बिंदी, पायल, झुमके और पल्लू संवारना—सब पीछे रह जाता है। बीमार होने पर भी उन्हें ताने और कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह कविता महिलाओं की अद्भुत सहनशीलता, उनके कर्तव्यों के प्रति समर्पण और रोज़मर्रा के जीवन में किए जाने वाले भावनात्मक परिश्रम को दर्शाती है, जो अक्सर अनदेखा रह जाता है।
सावन में जरूरी है सात्विक भोजन
सावन केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष होता है। इस महीने सात्विक भोजन अपनाना न केवल शिव आराधना में सहायक है बल्कि शरीर को हल्का, मन को शांत और आत्मा को निर्मल रखने का एक माध्यम भी है। इस बार सावन में सिर्फ आस्था नहीं, स्वास्थ्य की भी रक्षा करें — सात्विक जीवन अपनाएं।
अनदेखी नायिका: लक्ष्मी भोइर
यह कहानी है पालघर की लक्ष्मी गोपाल भोइर की, जो पिछले 30 वर्षों से हर दिन सुबह 2 बजे उठकर मंडी से ताज़ी सब्ज़ियाँ लाती हैं और मुंबई में बेचती हैं। 14 घंटे की कड़ी मेहनत के बावजूद उनके चेहरे पर मुस्कान और दिल में संतोष है। यह लेख उन अनदेखी महिलाओं की मेहनत और आत्मसम्मान को उजागर करता है, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है। जानिए एक साधारण दिखने वाली महिला की असाधारण जीवन यात्रा।
हिंदी पर बिंदी
हम सभी मिलकर हिंदी को अपना अत्यंत महत्वपूर्ण भाषा बनाना चाहते हैं। केवल अंग्रेज़ी के सहारे हमारा देश नहीं चमक सकता, इसलिए हमें हिंदी को आगे लाना होगा। आज से हम अपने सभी कार्य हिंदी में करेंगे और इसे देश की सर्वश्रेष्ठ पहचान दिलाएंगे। जब हम सभी हिंदी में संवाद करेंगे और अपने काम इसी भाषा में करेंगे, तभी देश का विकास वास्तविक रूप से संभव होगा। यह हमारा दृढ़ संकल्प है कि अंग्रेज़ी को राजभाषा मानने के बजाय हम हिंदी को अपनाएँगे और इसे सभी के बीच फैलाएँगे।
अनमोल सौगात हो तुम
जब कोई व्यक्ति हमारे जीवन में उम्मीद, सुकून और नई शुरुआत बनकर आता है, तो शब्द अपने आप कविता बन जाते हैं। “आंधियों में जलते दिए की बात हो तुम” ऐसी ही एक भावपूर्ण प्रेम कविता है, जिसमें प्रेम को पहली बरसात, उम्मीद की लौ और जीवन की अनमोल सौगात के रूप में महसूस किया गया है। हर पंक्ति दिल की गहराइयों से निकले जज़्बातों को सहज और खूबसूरत अंदाज़ में व्यक्त करती है।
सराफा चौपाटी के खिलाफ व्यापारी एकजुट
एक सितंबर से एक भी दुकान नहीं लगने देंगे, अन्यत्र शिफ्ट करें दस दिन बाद बड़ा-छोटा सराफा में चौपाटी लग पाएगी या नहीं इसे लेकर रस्साकशी की स्थिति बनना तय है। भाजपा को भी राजनीति करना है, पेंच यह भी फंस रहा है कि सराफा क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार का हिस्सा है और भाजपा…
दूरी की पहली आहट
‘दूरी की पहली आहट’ एक भावनात्मक लेख है जो रिश्तों में धीरे-धीरे बढ़ती दूरी, बदलते व्यवहार और भीतर जन्म लेती बेचैनी को गहराई से उकेरता है। यह कहानी उन अनकहे पलों की है, जब रिश्ता टूटता नहीं, बस धीरे-धीरे दूर होने लगता है।
माँ तो माँ होती है…
माँ का साथ शब्दों का मोहताज नहीं होता। कभी वह धूप में छाता बन जाती है, तो कभी जीवन की भीड़ में सहारा। उम्र भले ही शरीर पर अपना असर छोड़ दे, पर माँ की मौजूदगी वही सुकून देती है. निःशब्द, निःस्वार्थ और पूरी तरह सुरक्षित। माँ के साथ बिताया हर पल स्मृति बनकर जीवन भर साथ चलता है
