कैक्टस

वो कभी तन्हा न लगता है, गमले में भी कितना ख़ुश रहता है… कैक्टस की तरह जो जीवन की हर सख़्ती में भी मुस्कुराता है। न धूप की शिकायत, न छाँव की उम्मीद—बस अपनी मौजूदगी में जीता हुआ एक प्रतीक उम्मीद का।

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भीड़भाड़ वाली शहर की सड़क पर अकेला बैठा एक उदास व्यक्ति, आसपास लोग मोबाइल में व्यस्त, आधुनिक जीवन की संवेदनहीनता और अकेलेपन का दृश्य

खामोश रिश्ते

यह कविता आधुनिक समाज की उस सच्चाई को उजागर करती है, जहाँ हर व्यक्ति अपनी ही बात कहने में व्यस्त है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं बचा। रिश्तों की निकटता केवल भौतिक रह गई है लोग पास होकर भी दूर हैं, और मन की पीड़ा अनसुनी रह जाती है।

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पेड़ तो वही है, पर तुम बदल गए हो

मन्नत का धागा

“पेड़ तो वही है, पर तुम बदल गए हो…” प्रेम, इंतज़ार, तन्हाई और अधूरी चाहत की पीड़ा को व्यक्त करती यह कविता दिल की गहराइयों को छू जाती है। मन्नत के धागे से शुरू होकर प्रेम के दर्द तक की भावनात्मक यात्रा का मार्मिक चित्रण।

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महाकाल की महिमा अब सिनेमा में

साउथ सुपरस्टार पवन कल्याण अभिनीत मेगा बजट फिल्म ‘हरिहर वीरमल्लू (धर्मयुद्ध)’ 24 जुलाई को देशभर में पांच भाषाओं में रिलीज हुई। इस ऐतिहासिक फिल्म में उज्जैन के भस्म रमैया भक्त मंडल को धर्म की धुरी के रूप में विशेष भूमिका मिली है। यह फिल्म विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारत में किए गए मंदिरों के विध्वंस और सनातन धर्म की रक्षा में समर्पित वीरमल्लू के जीवन पर आधारित है। फिल्म में पवन कल्याण ने धर्मरक्षक वीरमल्लू की भूमिका निभाई है, जबकि बॉबी देओल औरंगज़ेब के रूप में नजर आएंगे।

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तूफानी रात में घर के अंदर डरी हुई महिला फोन उठाते हुए, सस्पेंस भरा माहौल

अब क्या होगा

आधी रात…
तूफ़ान अपने चरम पर था और घर के भीतर एक अजीब सन्नाटा पसरा हुआ था।अचानक फोन की घंटी गूंजी और शेफाली का दिल जैसे धड़कना भूल गया। सब कुछ सामान्य लग रहा था…पर फिर भी, उसके भीतर कुछ था जो कह रहा था सब ठीक नहीं है…

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…अगर ज़िंदगी फिर से मुड़ जाए

इस कविता में एक स्त्री अपने जीवन के उस मोड़ पर खड़ी होकर गुज़रे समय को फिर से जीने की ख्वाहिश करती है — वो अधूरे सपने, वो रिश्ते, वो बचपन की अलमारी, और माँ की बातें… सब कुछ एक बार फिर सहेजने की उम्मीद लिए। यह एक आत्ममंथन है, एक नई शुरुआत की ओर बढ़ने का भावुक आह्वान।”

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State-level fashion show event at Dayanand Kala Mahavidyalaya Latur with students performing confident ramp walk under bright stage lights.

लाइट्स, म्यूज़िक और स्टाइल का जादू

दयानंद कला महाविद्यालय में 22 कॉलेजों के 260 प्रतिभागियों ने बिखेरा हुनर संगीता लाहोटी ने किया भव्य उद्घाटन, विजेताओं को मिले आकर्षक पुरस्कार लातूर से डॉ. मीना घूमे की रिपोर्ट लातूर : यहां की सुप्रसिद्ध दयानंद शिक्षण संस्था के दयानंद कला महाविद्यालय, लातूर के फैशन एवं ड्रेस डिजाइन विभाग द्वारा भव्य ‘फ्यूजन 2026’ राज्य स्तरीय…

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सिगड़ी के पास सिमटी यादें

सिगड़ी की गर्माहट, मैया का स्नेह, ताई जी का अनुशासन और मम्मी की टोका-टाकी संयुक्त परिवार के वे दिन आज भी दिल को छू जाते हैं। यह संस्मरण बचपन, संस्कार और रिश्तों की उस दुनिया में ले जाता है, जहाँ हर सीख स्नेह के साथ मिली।

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river

नदी के आँसू

दी रोती भी है—पर पहाड़ उसकी आँखों के आँसू देख ही कहाँ पाते हैं। वो अपनी ऊँचाई की अकड़ में तने रहते हैं। उन्हें लगता है नदी तो बस बादलों की आवारा सखी है, बहती है, गुज़रती है… बस।

पर हक़ीक़त यह है कि पहाड़ की ऊँचाई को हरियाली, जीवन, शब्दसब कुछ नदी ही देती है। वही उसके अस्तित्व को अर्थ देती है। ऊँचाई अकेली कुछ नहीं होती गहराई चाहिए। और गहराई नदी ही देती है।

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अख़बार पढ़ने के चक्कर में

अख़बार बाँधते हुए उस दिन एक खबर ने मुझे रोक लिया।
वह सिर्फ़ एक फिल्मी समाचार नहीं था,
वह एक पूरे देश की धड़कन बन गया था।उस सुबह के बाद मैं अख़बार में पहले पन्ने नहीं,पहले अमिताभ बच्चन को खोजता था. क्योंकि कुछ नाम खबर नहीं होते,
याद बन जाते हैं।

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