मेरी ख़ामोशियाँ पढ़ लो तुम
“मेरी ख़ामोशियाँ पढ़ लो तुम” एक बेहद भावनात्मक हिंदी कविता है, जो अनकहे जज़्बातों और रूहानी प्रेम की गहराई को खूबसूरती से व्यक्त करती है। यह कविता उन भावनाओं की कहानी है, जिन्हें शब्दों में कहना मुश्किल होता है, लेकिन दिल उन्हें गहराई से महसूस करता है।
35 देशों के साइकिल सितारों से सजा पुणे
पुणे की सड़कों पर बजाज पुणे ग्रैंड टूर 2026 की भव्य शुरुआत, 35 देशों के 164 अंतरराष्ट्रीय साइकिल खिलाड़ी खिताब की दौड़ में शामिल.
ज्ञान का कलित वर्णन
यह कविता ज्ञान को रूप, रस, शब्द, अनुभव और विवेक के समग्र स्वरूप में प्रस्तुत करती है। बालक के ‘क, ख, ग’ से लेकर विद्वान की विरासत तक ज्ञान को जीवन, संघर्ष, विनम्रता और सहानुभूति की निरंतर यात्रा के रूप में रेखांकित करती है।
देह नहीं, आत्मा का अपमान
यह कविता एक स्त्री के उस अनुभव को गद्यात्मक रूप में सामने रखती है, जहां शारीरिक छेड़छाड़ के बिना भी उसकी गरिमा पर हमला किया जाता है. यह रचना बताती है कि किसी की घूरती, गंदी नजरें भी हिंसा का ही रूप होती हैं, जो मन को भीतर तक घायल कर देती हैं. कविता समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि अपराध केवल स्पर्श से नहीं, बल्कि दृष्टि और मानसिक उत्पीड़न से भी होता है, और ऐसी हर सोच व व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है.
हश्र..
आज वही देवतुल्य बेटा, जिसके जन्म पर पूरा घर-आँगन गूँज उठा था, सरे-बाज़ार नंग-धड़ंग खड़ा है—इज़्ज़त के नाम पर। जिस बेटे के लिए माँ ने मन्नतों के धागे बाँधे थे, दादी ने मिठाइयाँ बाँटी थीं और बधाई गीत गाए थे, आज वही बेटे के संस्कार समाज के सामने नंगे खड़े हैं।
कभी पोते के स्वागत में पतोहू को चुनरी ओढ़ाई गई थी, बुआ ने देहरी पर नेग के लिए अड़ गई थी, भाभी के कंगन उतरवाए गए थे और दादा ने सातों पत्तलों पर भोज करवा शान से जश्न मनाया था। किन्नरों को बुलाकर डैडी ने चाँदी के सिक्के उछाले थे। यह सब उस इकलौते कुलदीपक के नाम पर हुआ, जिसे देवपुत्र की तरह पूजा गया।
131 कारीगरों ने बनाई आमिर-गौरी की खास वेडिंग रिंग
आमिर खान की पत्नी गौरी स्प्रैट की वेडिंग रिंग इन दिनों चर्चा में है. मेडागास्कर की दुर्लभ रूबी, 40 असली हीरों और 131 कारीगरों की 256 घंटे की मेहनत से तैयार हुई इस अंगूठी की खासियत जानिए.
राँची में सजा शब्दों का महाकुंभ
साहित्य संकल्प, राँची इकाई द्वारा प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर साबित हुआ, जिसमें देशभर के रचनाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उर्मिला सिन्हा ने की। कार्यक्रम का संयोजन, संचालन एवं स्वागत उद्बोधन अर्पणा सिंह ‘अर्पी’ ने कुशलतापूर्वक किया।
महाशिवरात्रि पर भीमाशंकर मंदिर रहेगा बंद
महाशिवरात्रि 2026 के दौरान श्री क्षेत्र भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर भक्तों के लिए बंद रहेगा. नए भव्य सभामंडप, सीढ़ी मार्ग और परिसर विकास कार्यों के चलते सुरक्षा कारणों से जिला प्रशासन ने यह निर्णय लिया है. 12 से 18 फरवरी तक मंदिर में दर्शन संभव नहीं होंगे.
गुलमोहर की घनी छाँव
यह कविता पिता की स्मृतियों और उनके वात्सल्य को समर्पित एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। गुलमोहर की घनी छाँव और बचपन का घर कवयित्री के लिए पिता के स्नेह, सुरक्षा और अपनत्व का प्रतीक बन जाते हैं। पिता के दिए लाड़-दुलार, हर चिंता को समझने और कठिन समय में साथ देने की यादें आज भी उनके मन में जीवित हैं। पिता के जाने के बाद उनकी कमी और भी गहराई से महसूस होती है। कविता में बेटी अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है और मन में एक बार फिर उनकी गोद में सिर रखने की भावुक इच्छा प्रकट करती है।
