gulmohar

बलात्कार के केस की धमकी तीन युवकों से वसूली भारी रकम

,सोशल मीडिया पर पहचान बढ़ाकर एक युवती ने युवक को अपने घर बुलाया और उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया. इसके बाद बलात्कार का झूठा केस दर्ज करने की धमकी देकर उससे पौने दो लाख रुपये वसूले. जब उसने ५ लाख रुपये की मांग पूरी नहीं की तो उसके खिलाफ बलात्कार और एट्रोसिटी का गंभीर मामला दर्ज कर दिया गया. हैरान करने वाली बात यह है कि इसी तरह इस युवती ने नांदेड़ और कंधार के दो अन्य युवकों के खिलाफ भी बलात्कार और अट्रोसिटी का मामला दर्ज करवाया है.

Read More

स्वतंत्र कलम का हकदार होता है सच्चा पत्रकार

सोशल मीडिया के दौर में सच्ची और फर्जी खबरों के बीच का अंतर लगातार धुंधला होता जा रहा है। बिना प्रमाण-पत्र के स्वयं को पत्रकार बताकर कुछ लोग बेबुनियाद खबरें फैलाकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं, जिससे असली और जिम्मेदार पत्रकारिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जबकि सच्चा पत्रकार वही है जो निष्पक्षता, सत्य और सामाजिक दायित्व के साथ समाज और सरकार के बीच एक सेतु बनकर कार्य करता है।

Read More

पुणे बना ओपन लाइब्रेरी, 7 लाख लोगों ने पढ़ीं पुस्तकें

एक दिन के लिए ‘पुस्तकों की राजधानी’ बन गया. शहर के स्कूलों, कॉलेजों, ऑफिसों, मेट्रो, बस स्टैंड, धार्मिक स्थलों और आईटी पार्कों में लोगों ने एक साथ किताबें खोलकर ऐसा माहौल बनाया, मानो पूरा शहर एक विशाल ओपन लाइब्रेरी में बदल गया हो. ग्रुप रीडिंग की लगभग १०,००० तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गईं और आयोजन को राजेश पांडे, रमेश पाटील, योगेश शिंदे, स्वाति देशमुख, प्रिया जाधव के नेतृत्व में ‘शांतता.. पुणेकर वाचत आहे’ अभियान को बड़ी सफलता मिली. शाम ५ बजे तक १ लाख ३५ हज़ार से ज़्यादा लोगों ने किताबें पढ़ीं और फोटो अपलोड करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

Read More
15 फरवरी से खुलेगा पुणे रिवरफ्रंट, जानिए समय, सुविधाएं और पूरा प्लान

पुणे को मिलेगा नया सुकून का ठिकाना

15 फरवरी से रिवरफ्रंट विकास परियोजना का पहला हिस्सा आम नागरिकों के लिए खोलने जा रहा है. यहां वॉकिंग ट्रैक, साइकिल पाथ और हरियाली का अनुभव मिलेगा.

Read More
एक व्यक्ति शांत वातावरण में डायरी लिखते हुए, मन की गहराई को व्यक्त करता हुआ

मन की कही

“मन की कही” एक भावनात्मक और आत्मचिंतन से भरी हिंदी रचना है, जो मन की उन अनकही बातों को व्यक्त करती है जिन्हें हर किसी से साझा नहीं किया जा सकता। यह लेख विश्वास, आत्मीयता और मौन के महत्व को उजागर करता है, और बताता है कि क्यों हर दिल हमारे रहस्यों का भार नहीं उठा सकता। अंत में यह संदेश देता है कि एक पुस्तक ही सबसे सच्ची और निस्संदेह साथी बन सकती है।

Read More
महाभारत सभा में द्रौपदी श्रीकृष्ण को पुकारती हुई, दुशासन चीरहरण का प्रयास करता है, दिव्य प्रकाश से अनंत वस्त्र प्रकट होते हैं और सभा मौन खड़ी है।

हे गोविंद! मेरी लाज बचाओ

द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग पर आधारित यह मार्मिक कविता नारी सम्मान, अन्याय के विरुद्ध पुकार और श्रीकृष्ण की दिव्य रक्षा का भावपूर्ण चित्रण करती है।

Read More

“सृजनिका” के छठे अंक का गरिमामयी लोकार्पण

मुंबई से प्रकाशित त्रैमासिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका सृजनिकाके छठे अंक का लोकार्पण मंगलवार, 26 अगस्त को कुर्ला स्थित यूकेएस इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ एंड रिसर्च के सभागार में हुआ.
समारोह के मुख्य अतिथि हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक (नॉन-फ्यूल बिज़नेस) मुरलीकृष्ण वेंकट वाद्रेवु ने हिंदी को व्यवसाय-वृद्धि की महत्वपूर्ण सहयोगी भाषा बताते हुए अपने अनुभव साझा किए.

Read More
भीड़भरी भारतीय सिटी बस में एक कॉलेज लड़की गर्भवती मजदूर महिला को सीट पर बैठा रही है, जबकि अन्य यात्री शर्मिंदा नजर आ रहे हैं।

शर्मिंदा

“शर्मिंदा” एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो समाज की संवेदनहीनता और दिखावटी व्यवहार पर गहरा प्रहार करती है। बस में खड़ी एक गर्भवती मजदूर महिला को कोई सीट नहीं देता, लेकिन कुछ युवाओं का व्यवहार कॉलेज लड़कियों के आते ही बदल जाता है। तभी एक समझदार लड़की इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए महिला को सीट पर बैठा देती है। यह छोटी-सी घटना बड़े सामाजिक संदेश के साथ सामने आती है। कहानी बताती है कि सम्मान रूप देखकर नहीं, जरूरत देखकर देना चाहिए। यह लघुकथा पाठकों को आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है।

Read More
रेगिस्तान में दूर क्षितिज की ओर देखती एक उदास महिला, आसमान में उमड़ते काले बादल

मृगतृष्णा

‘मृगतृष्णा कविता’ जीवन की उस अंतहीन प्यास और टूटती उम्मीदों की कहानी है, जहाँ रेगिस्तान केवल बाहर नहीं, भीतर भी फैला होता है। यह कविता दर्द, अकेलेपन और एक नई शुरुआत की आस को संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है।

Read More

तेरी यादों का शहर

यह दिल तेरी यादों से पीछा नहीं छुड़ा पाता, जैसे हर गली, हर मोड़ पर वही पुराना चेहरा इंतज़ार में खड़ा हो। दिल इतना सख़्त है कि आँसू तक नहीं निकलते, और तेरे मोहल्ले से दूर होकर भी जीने का ख्याल अधूरा लगता है, क्योंकि मेरे दिल का शहर कहीं और बसता ही नहीं। तेरी यादों की गलियों में भटकते हुए सोचता हूँ—इन तमाम यादों में कभी मेरा भी नाम क्यों नहीं आता।

Read More