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कृष्ण की बाँसुरी और मधुर संगीत की प्रतीकात्मक छवि

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम…

कृष्ण की बाँसुरी की अलौकिक तान से लेकर हिंदी फिल्मों के सदाबहार गीतों तक, बाँसुरी ने संगीत में प्रेम, विरह, प्रकृति और भावनाओं को एक अलग पहचान दी है।

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समुद्र किनारे सूर्यास्त के समय खुद के साथ एकांत में खड़ी महिला

खुद से मिलने की तमन्ना

कभी-कभी जिंदगी की भागदौड़ से दूर जाकर खुद के साथ कुछ पल बिताने का मन करता है। ‘खुद से मिलने की तमन्ना’ उसी इच्छा की कविता है, जहाँ समुद्र, पहाड़, हवा और ढलता सूरज मन की आज़ादी के प्रतीक बन जाते हैं।

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मुरली की धुन सुनते राधा और कृष्ण का यमुना तट पर भावुक दृश्य

 “मुरली की धुन”

राधा-कृष्ण का प्रेम केवल सांसारिक प्रेम नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और त्याग का प्रतीक माना जाता है। ‘मुरली की धुन’ इसी अमर प्रेम की एक भावुक कथा है, जिसमें कृष्ण अपनी राधा से किया वचन निभाने के लिए उनके जीवन के अंतिम क्षणों में लौटकर आते हैं।

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निर्लिप्त एकांत हिंदी कविता के लिए पुराने घर की खिड़की और जल पर चाँद के प्रतिबिंब का भावपूर्ण दृश्य

निर्लिप्त एकांत

‘निर्लिप्त एकांत’ उस मन की कविता है जो किसी की स्मृति का बोझ नहीं बनना चाहता. एक खिड़की, जल पर चाँद का क्षणिक प्रतिबिंब और एक रिक्त स्थान के रूपक के माध्यम से कविता अदृश्य हो जाने की गहरी इच्छा को व्यक्त करती है.

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नदी के किनारे बच्चों को बचाती एक ग्रामीण महिला पर आधारित हिंदी कहानी टोनही

टोनही : अंधविश्वास के पार इंसानियत की कहानी

जिस स्त्री को अंधविश्वास के कारण समाज से दूर रखा गया, वही संकट की घड़ी में बच्चों की जान बचाने के लिए सबसे पहले दौड़ी। ‘टोनही’ इंसानियत, पूर्वाग्रह और पश्चाताप की मार्मिक कहानी है।

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स्त्री सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर प्रेरणादायक हिंदी कविता

मैं स्वयं में एक पूरी स्त्री हूँ…

यह कविता हर उस लड़की के नाम है, जो सिंगार के साथ संघर्ष करना, रिश्तों के साथ अपनी पहचान बचाए रखना और किसी के सहारे के बजाय अपने सपनों के सहारे आगे बढ़ना चाहती है।

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शालिनी वर्मा के काव्य संग्रह ‘धीरे-धीरे उजाला’ के लोकार्पण समारोह का दृश्य

शालिनी वर्मा के ‘धीरे-धीरे उजाला’ का लोकार्पण

दोहा में पिछले 24 वर्षों से हिंदी और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय शालिनी वर्मा के काव्य संग्रह ‘धीरे-धीरे उजाला’ का नई दिल्ली में लोकार्पण हुआ. संग्रह प्रवासी जीवन की स्मृतियों, संवेदनाओं और उम्मीदों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति देता है.

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पुराने खतों की याद पर हिंदी कविता

खतों की खुशबू कहाँ जाती है…

खतों का वह दौर, जब शब्दों में रिश्तों की गर्माहट और इंतजार की मिठास बसी होती थी. ‘चलो, आज हम फिर से खत लिखते हैं’ पुराने खतों, प्रेम और यादों की उसी खूबसूरत दुनिया को फिर से महसूस कराने वाली कविता है.

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‘सुप्रसन्ना’ अवनि से अम्बर तक

वनगाँव की मिट्टी और मिथिला की सांस्कृतिक चेतना से लेकर जोधपुर की साहित्यिक दुनिया तक सुप्रसन्ना की यात्रा संस्कार, संवेदना और सृजन की कहानी है. हिन्दी और मैथिली में लेखन करने वाली सुप्रसन्ना से साहित्य, कविता, स्त्री-मन, लोकसंस्कृति और रचनात्मकता पर आत्मीय बातचीत.

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किश्वर अंजुम हिंदी लेखिका और कवयित्री का साहित्यिक इंटरव्यू

“मेरे भीतर अभी बहुत कुछ बाक़ी है” : किश्वर अंजुम

किश्वर अंजुम से विशेष बातचीत में उनकी साहित्यिक यात्रा, कविता, कहानी, रहस्य-कथा, सामाजिक सरोकार और स्त्री की ख़ामोशी जैसे विषयों पर विस्तार से बातचीत हुई. लेखिका कहती हैं “मेरी कहानी अभी पूरी कहाँ हुई है, बात अभी बाक़ी है.

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