gulmohar

साथ मेरा…..

मधु चौधरी, लेखिका, बोरीवली (मुंबई) हर सांचे में ढलने का हुनर रखती हूंकहर बरपा हो तो भी साथ निभाने काहुनर रखती हूंफेरों का हो या ना हो बंधनवादे करके निभाने काहुनर रखती हूंतेरे दुख में , तू ना डूबे यह भी हुनर रखती हूंतेरे सुख में , तू ना बहके यह भी हुनर रखती हूंबस…

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शून्यता और अकेलेपन को दर्शाता एक व्यक्ति, जो विचारों के सागर में खोया हुआ है

मुझमें कुछ भी नहीं है जिंदा..

आज के दौर में, जब हर व्यक्ति भीड़ का हिस्सा बनता जा रहा है, उसकी सबसे बड़ी लड़ाई खुद से ही है। “शून्यकाल” कविता इसी आंतरिक संघर्ष और अस्तित्व की खोज को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है। कविता में ‘मैं’ का पात्र खुद को खाली और शून्य महसूस करता है, जहाँ शब्द तो हैं, पर उनके पीछे कोई ठोस अर्थ नहीं बचा।

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मंद मुस्कान के साथ खड़ी एक युवती, जिसकी आँखों में बचपन और प्रेम की मासूम यादें झलक रही हैं।

लम्हा

कुछ रिश्ते उम्र नहीं, एहसास जीते हैं। “लम्हा” कविता सोलह-सत्रह की मासूमियत, बचपन की खुशबू और प्रेम की कोमल मुस्कुराहटों को बेहद संवेदनशीलता से उकेरती है।

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जिम्मेदारियों के बीच लुका-छुपी वाले प्रेम को दर्शाता प्रेमी युगल

लुका-छुपी वाला प्रेम

समय की कमी हमेशा प्रेम की कमी नहीं होती। जब जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं और साथ बिताने का समय कम हो जाता है, तब विश्वास, संवाद और समझ रिश्ते को मजबूत बनाए रखते हैं।

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जिंदगी और कट चाय

पल-पल बीतते जा रहे हैं, और जीवन का रस धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। इसलिए बेकार की बातें छोड़कर मौजूदा समय का आनंद लेना चाहिए। मित्रों के साथ बिताए गए पल, उनकी हँसी, कभी-कभी उनके आँसुओं की चिंता, और साथ में पी गई चाय—ये सब छोटी-छोटी खुशियाँ जीवन को पूर्ण बनाती हैं। यह कविता समय की अनवरत गति, मित्रता, साधारण सुख और जीवन के क्षणों की क़ीमत का स्मरण कराती है।

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जुन्नर से गुजरात: 50 तेंदुए जा रहे नए घर

जुन्नर (महाराष्ट्र) से गुजरात तक तेंदुओं का बड़ा “मूवमेंट” होने वाला है। केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण ने 19 दिसंबर को महाराष्ट्र के जुन्नर वन विभाग के 50 जंगली तेंदुओं को गुजरात के ग्रीन प्राणी शास्त्रीय बचाव और पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी है। इस निर्णय से जुन्नर वन क्षेत्र के मानव-वन्यजीव संघर्ष में राहत मिलने की उम्मीद है।

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₹125 की सेकंडहैंड साइकिल से पत्रकारिता की राह पर निकला मुन्ना

मुन्ना से कीर्ति राणा

यह कहानी एक ऐसे जांबाज पत्रकार की है, जिसने अपनी पत्रकारिता में कामरेडी अंदाज कभी नही छोड़ा.. वह इंदौर का कल का मुन्ना..आज शहर नहीं देश का एक अच्छे पत्रकारों में शुमार है यह कहानी उसी की जुबानी है. मुन्ना कैसे पत्रकार कीर्ति राणा बना. घटना, देशकाल वातावरण सभी उन्हीं की पुस्तक किस्से कलमगिरी से लिए गए हैं. (कीर्ति राणा की किताब किस्से कलमगिरी के की यह सीरीज 4के पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी. ऐसा मेरा विश्वास है)

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वैवाहिक समारोह में पार्ट टाइम काम करता होटल मैनेजमेंट का मेहनती युवा

नयी उम्मीद

एक वैवाहिक समारोह में मिले मेहनती युवक की प्रेरक कहानी, जो होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम कर रहा है. यह कहानी आज के युवाओं के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है.

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नारी शक्ति का प्रचंड रूप, दुर्गा और काली के स्वरूप में अन्याय के खिलाफ खड़ी महिला

रूदन नहीं हुंकार चाहिए

यह कविता नारी के उस रूप को उजागर करती है जो केवल सहन नहीं करती, बल्कि अन्याय के खिलाफ हुंकार भरती है। जब अत्याचार सीमा पार करता है, तो वही नारी काली, दुर्गा और लक्ष्मीबाई बनकर अन्याय का अंत करती है।

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“कभी तो आओ… फुर्सत के इतवार बनकर”

यह कविता एक गहरी प्रतीक्षा की पुकार है—जहाँ मन किसी के आगमन की राह देख रहा है, जो कभी फुर्सत, कभी मल्हार, कभी रंग और कभी आसुओं की धार बनकर आए। भावनाओं से सजी ये पंक्तियाँ एक ऐसी उपस्थिति की चाहत हैं, जो जीवन को फिर से स्पर्श करे, संगीतमय बनाए और रंगों से भर दे।

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