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औषध या टोना

“ज्ञान जब अज्ञान में डूब जाए तो टोना कहलाता है…
पर समझो तो वही औषध है, वही विद्या।” गाँव के लोग जिन शब्दों को मंत्र समझते थे, वे दरअसल उपचार थे और जिस औरत को ‘डायन’ कहा गया, वही जीवन लौटाने वाली वैद्य निकली। विश्वास और अंधविश्वास की पतली सरहद उस रात फिर धुंधली हो गई।

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साधारण सूती साड़ी पहने महिला और ब्रांडेड कपड़ों में खड़ा पुरुष, सादगी और दिखावे के बीच भावनात्मक अंतर दर्शाता दृश्य

सिर्फ तुम चाहिए

यह कविता आधुनिक जीवन के दिखावे और सादगी के बीच के द्वंद्व को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत करती है। कवि यह संदेश देता है कि रिश्तों में ब्रांड्स और बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि सच्चाई और सादगी ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। प्रेम का असली रूप व्यक्ति के भीतर होता है, न कि उसके पहनावे या स्टेटस में।

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अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाते श्रद्धालु और स्वच्छता अभियान के तहत लगाए गए डस्टबिन

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी का स्वच्छ संदेश

अमरनाथ यात्रा 2026 देश की पहली जीरो लैंडफिल धार्मिक यात्रा बनने जा रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के लिए कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, बायोगैस निर्माण और प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था की व्यापक तैयारी की है।

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उफनते सागर के किनारे खड़ा एक चिंतनशील व्यक्ति अपनी परछाई को निहारता हुआ, समय, अस्तित्व और जीवन के बदलते किरदारों पर मनन करता हुआ।

किरदार

हम सभी अपने भीतर कई किरदारों को जीते हैं। कुछ समय के साथ खो जाते हैं, कुछ स्मृतियों में रह जाते हैं, और कुछ जीवन के संघर्षों के बीच नई पहचान गढ़ते हैं। ‘किरदार’ जीवन, समय, जिजीविषा और आत्म-अस्तित्व की उसी अंतर्द्वंद्वपूर्ण यात्रा का काव्यात्मक दस्तावेज़ है।

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इंतज़ार में डूबी प्रेमिका, जो अपने प्रिय की याद में खिड़की के पास बैठी है

तुम दूर हो या क़रीब ?

जब संवाद थम जाता है और इंतज़ार लंबा हो जाता है, तब प्रेम अपने भीतर सवालों की शक्ल लेने लगता है। यह रचना उसी असमंजस को स्वर देती है, जहाँ नज़दीकियाँ इतनी गहरी रही हैं कि दूरी का अर्थ समझ में ही नहीं आता। प्रेम में किया गया भरोसा, व्यस्तताओं के बीच पनपती बेचैनी और यह डर कि कहीं अपना व्यक्ति धीरे-धीरे दूर तो नहीं हो रहा इन्हीं भावों के बीच यह कविता पाठक को रिश्तों की सबसे कोमल और सच्ची अनुभूति से जोड़ती है।

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कोई लौटा दे मेरे… वो स्कूल के दिन!

पैदल स्कूल जाना, बिना ट्यूशन के पढ़ाई, सादगी भरा जीवन और माता-पिता की निश्चिंतता। सुविधाओं की कमी के बावजूद उस दौर में संतोष, आत्मनिर्भरता और खुशियों की भरपूर अनुभूति थी, जो आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में दुर्लभ हो गई है।

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पंखुड़ियों में छुपा है सेहत का राज़

गुलाब केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सेहत का संरक्षक भी है। इसकी पंखुड़ियों में छिपे गुण न केवल वजन घटाने, तनाव कम करने और त्वचा को निखारने में सहायक हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूती प्रदान करते हैं। आज के समय में गुलाब एक प्राकृतिक इलाज के रूप में फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है।

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 पुणे में  ‘उगम’ संगीत कार्यक्रम17 अगस्त को

प्रसिद्ध हारमोनियम वादक तन्मय देवचके की स्वरानुजा संगीत अकादमी की और से रविवार, 17 अगस्त 2025 को ‘उगम’ कार्यक्रम का चौथा संस्करण आयोजित किया जाएगा । यह कार्यक्रम तिलक रोड के न्यू इंग्लिश स्कूल के गणेश हॉल में सुबह 10 बजे से शुरू होगा। कार्यक्रम सभी के लिए निःशुल्क रहेगा और पहले आने वाले रसिकों को प्राधान्य इस आधार पर कार्यक्रम के लिए प्रवेश दिया जायेगा। कुछ सीटें आमंत्रितों के लिए आरक्षित रहेंगी।
इस कार्यक्रम में तन्मय देवचके के दुनिया भर के छात्रों की विशेष प्रस्तुतियाँ होंगी, जो अपनी हारमोनियम कौशल का प्रदर्शन करेंगे। तन्मय देवचके के वरिष्ठ छात्र निलय साळवी और अथर्व कुलकर्णी तबले पर अनीश थत्ते के साथ एकल हारमोनियम वादन करेंगे।

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श्रम आधार

यह कविता कर्म, समर्पण और श्रम के प्रति निष्ठा को दर्शाती है। इसमें कर्मवीरों की जीवन-दृष्टि को उकेरा गया है—चाहे परिणाम हार हो या जीत, वे निरंतर लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं। उनके लिए श्रम ही पूजा है और यही उनका धर्म भी। कविता यह संदेश देती है कि मन में संकल्प की ज्वाला हो, तो मनमोहक सपनों को भी साकार किया जा सकता है। ऋतुओं के बदलाव की तरह ही समय का संदेश है कि सेवा, संयम और श्रम से ही समाज सुखी बनता है। यही नहीं, कविता एक सिपाही की वीरता को भी चित्रित करती है, जो फौलादी सीने में विश्व विजय का सपना लिए रणभूमि में हुंकार भरता है। कुल मिलाकर, यह रचना कर्म, सेवा और श्रम की शक्ति का उत्सव है।

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