अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी का स्वच्छ संदेश

अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाते श्रद्धालु और स्वच्छता अभियान के तहत लगाए गए डस्टबिन अमरनाथ यात्रा मार्ग पर लगाए गए डस्टबिन

देश की पहली जीरो लैंडफिल धार्मिक यात्रा

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे

श्रीनगर। इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा केवल आस्था का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने श्री अमरनाथ यात्रा-2026 को देश की पहली ‘जीरो लैंडफिल पिलग्रिमेज’ (Zero Landfill Pilgrimage) बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसका उद्देश्य यात्रा के दौरान निकलने वाले कचरे को लैंडफिल में भेजने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और पुनः उपयोग करना है।

3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा में चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। प्रशासन के अनुसार, यात्रा के दौरान लगभग 700 मीट्रिक टन कचरा निकल सकता है, जिसके वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है।

कचरे से बनेगी ऊर्जा

यात्रा मार्ग पर खच्चरों से निकलने वाले गोबर का उपयोग बायोगैस बनाने में किया जाएगा। वहीं प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए विभिन्न स्थानों पर वॉटर एटीएम लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालु बार-बार प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग न करें।

इसके अलावा बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए गए हैं। ठोस और तरल कचरे के अलग-अलग संग्रह और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए विशेष सफाई दल तैनात किए गए हैं।

आधुनिक तकनीक से होगा कचरे का प्रबंधन

ग्रामीण स्वच्छता विभाग की महानिदेशक अनु मल्होत्रा के अनुसार, यात्रा के पहले दिन से ही सफाईकर्मी लगातार कचरा एकत्र कर रहे हैं। हाई-एंड मशीनों की मदद से कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार का अपशिष्ट लैंडफिल तक न पहुँचे।यह पहल स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट और जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण स्वच्छता विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित की जा रही है।

एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

यात्रा के शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। पहले चार दिनों में करीब 86 हजार श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके थे और पाँचवें दिन यह संख्या एक लाख के पार पहुँचने की उम्मीद जताई गई।

इस वर्ष यात्रा के लिए चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण के आने वाले यात्रियों को निर्धारित तिथि से पहले आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बालटाल और पहलगाम मार्ग पर बनाए गए चेक पोस्टों पर केवल पंजीकृत श्रद्धालुओं को ही आगे बढ़ने दिया जा रहा है।

प्राकृतिक रूप से बनता है हिम शिवलिंग

अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक है। यह किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि गुफा की छत से टपकने वाला पानी जमकर प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट का रूप लेता है। मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के अनुसार हर वर्ष इसका आकार बदलता रहता है, जो इसकी सबसे अनोखी विशेषता मानी जाती है।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को केंद्र में रखकर शुरू की गई यह पहल धार्मिक यात्राओं के लिए एक नई मिसाल बन सकती है।

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