अकेला व्यक्ति भीड़ में खोया हुआ

माफ़ कर दे मुझे…

यह ग़ज़ल एक टूटे हुए दिल की सच्ची पुकार है, जहाँ प्रेम अब भी जीवित है, लेकिन रिश्ते की दूरी उसे लगातार घायल करती रहती है। शायर ने बड़ी सादगी और गहराई से उस भावना को व्यक्त किया है, जब इंसान अपने ही प्रेम में खुद को खो देता है।

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अर्तम काव्य संग्रह की पुस्तक के साथ शिव और कमल का प्रतीकात्मक चित्र

‘अर्तम’ काव्य संग्रह समीक्षा: दिव्या सक्सेना की संवेदनशील कविताएं

मकालीन हिंदी कविता के बदलते परिदृश्य में दिव्या सक्सेना का काव्य संग्रह ‘अर्तम’ एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में सामने आता है। यह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवन, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना की गहरी पड़ताल है।

आज के दौर में जहां कविता अक्सर सपाट बयानी और अतुकांत शैली तक सीमित होती जा रही है, वहीं ‘अर्तम’ अपनी प्रतीकात्मकता, भाव-गहनता और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण अलग पहचान बनाता है। इस संग्रह में शिवत्व, आत्मबोध, स्त्री-चेतना और जीवन संघर्ष जैसे विषयों को सहज लेकिन प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

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मोह और प्रेम

लिखने को कुछ नहीं था, परंतु शब्द मस्तिष्क में ऐसे कुलबुला रहे थे मानो बाहर आने को व्याकुल हों।
मन के दो छोर सामने थे—एक ओर मोह, जो मुट्ठी में क़ैद था, और दूसरी ओर प्रेम, जो आज़ाद पंछी की तरह उड़ना चाहता था। यह विडंबना ही थी कि प्रेम ने ही मोह को जन्म दिया, फिर भी उसी की कैद प्रेम को असह्य हो गई।मोह के भीतर संदेह के जीवाणु पलते रहे, जिन्हें प्रेम ने कभी स्वीकार नहीं किया।प्रेम बसंत की शुरुआत था—नवजीवन का उत्सव, जबकि मोह पतझड़ का सूना संदेश।
प्रेम उमड़ते समंदर की लहर था, मोह रेत का वह कण, जो मुट्ठी में थमता ही नहीं और फिसल जाने को आतुर रहता है।

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“राष्ट्रीय गणित दिवस” पर हुआ लघु फिल्म का लोकार्पण

यूट्यूब पर सफल लघु फिल्मों की श्रृंखला के बाद “द यश मंगलम शो” की नवीनतम प्रस्तुति लघु फिल्म “द लीगेसी ऑफ मैथेमेटिक्स” का लोकार्पण 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर किया गया। इस अवसर पर बिहार फिल्म विकास निगम के मुख्य सलाहकार अरविंद रंजन दास ने फिल्म का औपचारिक विमोचन किया।

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बरसाती आकाश के नीचे दूर क्षितिज की ओर देखते दो धुंधले मानवीय सिल्हूट, प्रेम, दूरी और अस्तित्व की खोज का प्रतीकात्मक दृश्य।

प्रेम

प्रेम क्या है? शायद कोई निश्चित उत्तर नहीं। यह कविता प्रेम को सामाजिक सीमाओं, वर्ग, धर्म और परिभाषाओं से परे एक ऐसी अनुभूति मानती है, जो पूरी नहीं होती—सिर्फ खोजी जाती है।

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लाल टेशू के फूलों से लदे पेड़ की डाल पर बैठी एक अकेली स्त्री की परछाईं, पृष्ठभूमि में धुंधला बियाबान जंगल

उसने चाहा प्रेम…

यह कविता स्त्री की उन अधूरी इच्छाओं की कहानी कहती है जिन्हें समाज ने अपराध, पाप या विद्रोह घोषित कर दिया। प्रेम, सौंदर्य, आध्यात्म और स्वतंत्रता की चाह रखने वाली स्त्री हर मोड़ पर दंडित होती रही लेकिन अंततः वह अपनी ही आग में एक नई सत्ता बनकर उभरती है।

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शिव की शिवा 

सम्पूर्ण वातावरण ढोल, ढाक और ताशों की लयबद्ध ध्वनि से गूँज रहा था। घर-घर से दुर्गा स्तोत्र और आरती के साथ शंख और घंटियों की आवाज़ें आ रही थीं। शारदीय नवरात्र और देवी दुर्गा मइया की भक्ति में शहर डूबा था।नौमी की संध्या-आरती के बाद मालकिन ने फलाहार किया और रेशमा को भी खाने दिया। रेशमा, जिसे बचपन से मालकिन ने गोद में रखा और नाम दिया था, उनकी हर बात और हर काम का अनुसरण करती थी।
शरद की ठंडी रात में, मालकिन ने खिड़की से देखा कि एक लड़की बेतहाशा भाग रही है — पीछे दो-तीन गुंडे उसका पीछा कर रहे थे। लड़की की पीठ और बाँह घायल थी। मालकिन तुरंत देवी माँ से प्रार्थना करती हुई उसके पीछे दौड़ीं।

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रविवार, 13 जुलाई को मध्य रेल पर मेगा ब्लॉक
– कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें प्रभावित

13 जुलाई, रविवार को मध्य रेल के मुंबई मंडल में विद्याविहार–ठाणे और कुर्ला–वाशी के बीच मेगा ब्लॉक लागू रहेगा। इस दौरान कई मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें डायवर्ट की जाएंगी और हार्बर लाइन की उपनगरीय सेवाएं रद्द रहेंगी। रेलवे ने यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और विशेष लोकल ट्रेनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई है।

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भारतीय शादी में दूल्हा-दुल्हन मोबाइल से रील बनाते हुए, पीछे भावुक परिवार के सदस्य.

स्क्रीन पर मुस्कान, रिश्तों में बढ़ती खामोशी

रील और वायरल होने की दौड़ में क्या रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं? जानिए कैसे सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव शादी, परिवार, दोस्ती और सामाजिक जीवन की भावनाओं को बदल रहा है.

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