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स्वर्ग इसी जहाँ में

मनुष्य का असली मूल्य तभी है जब वह जीवन के अंधकार से उजाले की ओर बढ़ सके। अगर हम मृत्यु की चादर को हटाकर जीवन को नयी सुबह दे सकें, तभी हमारा अस्तित्व सार्थक है।
सच्चा जीवन वही है जहाँ हम प्रेम की एक बूँद पी भी सकें और किसी और को पिला भी सकें। जहाँ गिरने वाले को उठाने का सामर्थ्य हो, मुश्किलों में गीत गाने का साहस हो।
अगर हम अपने घर–आँगन को स्वर्ग में न बदल पाएँ, यदि दो दिलों की दूरियाँ कम न कर पाएँ, भूख से लड़ने के लिए रोटियाँ न जुटा पाएँ, और अन्याय देखते हुए भी आँख न उठा पाएँ—तो फिर चाँद पर जाने का क्या लाभ? ऐसे में हमें इंसान कहलाने का भी अधिकार नहीं।

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रिश्ते कुछ जाने कुछ अनजाने से

रिश्ते कुछ जाने-पहचाने होते हैं और कुछ अनजाने। कुछ जन्म से मिलते हैं तो कुछ समय और प्रयास से बनते हैं। ये कलियों की तरह कोमल और फूलों की तरह नाज़ुक होते हैं, लेकिन धैर्य और निभाने से लंबे समय तक टिके रहते हैं। समझ की डोर से बंधे ये रिश्ते जीवन के तूफ़ानों में भी नहीं टूटते। सुख-दुख में ये हमेशा साथ चलते हैं और एक-दूसरे को सहारा देते हैं। सच्चे रिश्ते प्रेम, समर्पण और ईमानदारी से पनपते हैं, और हर चुनौती का सामना मिलकर करते हैं। कठिनाइयों में ये हौसला बढ़ाते हैं और संघर्षों को जीत में बदल देते हैं। मन की उथल-पुथल में भी ये शांति देते हैं और आंधियों में भी अडिग खड़े रहते हैं। निराशा के क्षण आते हैं, फिर भी सच्चे रिश्ते कभी टूटते नहीं, क्योंकि इन्हें जोड़ती है भरोसे, करुणा और आपसी देखभाल की ताक़त।

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सिगड़ी से आंख फेरी तो गैस भट्टी में झुलसने लगी सराफा चौपाटी !

जिन सराफा व्यापारियों ने दशकों पहले अपने ओटले किराए पर देकर सराफा चौपाटी के दुकानदारों को कंधे पर बैठाया आखिर वही क्यों अब उन्हें यहां से भगाने पर आमादा हो गए। कुछ सालों में बने इस हालात की एक बड़ी वजह है सिगड़ी के सम्मान को भूल कर चौपाटी की दुकानों में गैस भट्टी का मोह बढ़ता जाना ।
संकरी गलियों वाले सराफा क्षेत्र में चाट-व्यंजन की इन दुकानों का इतिहास करीब नौ दशक पुराना है। तब चौपाटी के दुकानदार खानपान की सामग्री घर से ही बना कर लाते थे और इस खाद्य सामग्री को गर्म रखने के लिए कोयले वाली सिगड़ियों का इस्तेमाल करते थे

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व्यथा वृक्ष की…

कविता वृक्ष की पीड़ा और धैर्य का जीवंत चित्र खींचती है। गहरी जड़ों वाला यह वृक्ष कई अत्याचार और आघात सहकर भी खड़ा है। उसका कोमल तन और मन भले ही पत्ते-पत्ते, रेशा-रेशा झर गया हो, पर वह पूरी तरह टूटा नहीं। जर्जर होने के बाद भी वह आशा से भरा है कि उसकी शाखाओं पर फिर से नवकोपलें फूटेंगी, हरा-भरा जीवन लौटेगा।
वह स्वयं से प्रश्न करता है कि आखिर उसने क्या ग़लत किया था—सबको आसरा देकर, फल-फूल देकर, उदर-तृप्ति कराकर भी क्यों आहत होना पड़ा? पर साथ ही उसमें यह अटूट विश्वास है कि उसका अस्तित्व ही धरती के जीवन का आधार है। वह मनुष्यों को स्मरण कराता है—यदि वे उसे पोषित करेंगे तो बदले में वह उन्हें संरक्षण देगा।

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जीवन एक अमूल्य अभिलेख : नफ़रत से हारो मत

आज का जीवन बहुत उलझा हुआ है जहाँ सब कुछ अनिश्चित है—साँस से लेकर रिश्तों तक, ठहराव से लेकर बहाव तक। नई पीढ़ी चकाचौंध और भटकाव के बीच उलझ रही है, जबकि यही स्वतंत्रता और खुले आकाश की राह पिछली पीढ़ियों की संघर्षशील महिलाओं ने तैयार की थी। इस संदर्भ में ओपरा विनफ्रे का जीवन प्रेरणा देता है, जिन्होंने नफ़रत और कठिनाइयों से हार न मानकर ईमानदारी और साहस से अपने साधारणपन को असाधारण बना दिया। उनका संदेश स्पष्ट है—झूठ से बचो, ईमानदार रहो, और भय की जगह साहस को चुनो।

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प्रेम की पराकाष्ठा

जाने कब मेरे अंदरपनप उठीं नई कोंपलों की भांतिअद्भुत, असीम, निष्कलुष, निर्विकार, निरुद्देश्य—- उस सूखे वृक्ष साजो निष्प्राण खड़ा थामेरे समक्ष,मैंने उसे सींचने की नाकाम कोशिश कीपरंतु, असफल रही…वह यूं ही बुत सा खड़ा रहा,अपनी टहनियों में उसनेएक पत्ता भी न आने दिया।मैं परिणाम की अपेक्षा किए बगैर उसेसींचती रही औरवह ग्रास लेता रहा।मुझसे विमुख…

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जिद्दी नदी…

नदी बड़ी जिद्दी है। उसे अपने खारेपन पर अड़ जाने की जिद है, अपने अस्तित्व को खोकर भी दरिया में समा जाने की चाह है। दरिया ने कितनी ही नदियों को अपने में समा लिया, फिर भी उसकी प्यास कभी बुझी नहीं। नदी अपनी मिठास खोकर खारी हो गई, लेकिन दरिया ने कभी उसकी मिठास नहीं अपनाई। उसकी लहरें न जाने किसकी तलाश में सदा बहती रहती हैं। सब नदियाँ अपने आप को खो चुकीं, फिर भी उसकी प्यास असीम बनी रही। नदियाँ सब मिलकर ही सागर बनाती हैं। पर यह सागर अब भी किसी सीप की आशा में छलकता रहता है। और तब याद आता है कि नदी केवल जलधारा नहीं, वह माँ भी है—हम सबकी माँ। जिसने हमें यह सिखाया कि खुद को खोकर ही सब कुछ पाया जा सकता है।

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स्पीड ब्रेकर ने लौटाई सांसें

इसे चमत्कार ही कहा जाएगा! उज्जैन जिले के खाचरोद क्षेत्र में एक महिला, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, एक स्पीड ब्रेकर के झटके से फिर से जीवित हो उठी. मृत महिला की सांसें लौटीं, यह घटना पूरे गांव और समाज के लिए कौतूहल और खुशी का विषय बन गई है.
खाचरोद की रहने वाली 75 वर्षीय अयोध्या बाई की 20 अगस्त को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. उनके बेटे उन्हें तुरंत इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल ले गए. जांच में पता चला कि उनके सिर की नस फट गई है.

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सराफा चौपाटी के खिलाफ व्यापारी एकजुट

एक सितंबर से एक भी दुकान नहीं लगने देंगे, अन्यत्र शिफ्ट करें दस दिन बाद बड़ा-छोटा सराफा में चौपाटी लग पाएगी या नहीं इसे लेकर रस्साकशी की स्थिति बनना तय है। भाजपा को भी राजनीति करना है, पेंच यह भी फंस रहा है कि सराफा क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार का हिस्सा है और भाजपा…

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नागपुरकर भोसले घराने का इतिहास गौरवशाली : फडणवीस

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सेना साहेब सुभा श्रीमंत राजे रघुजी भोसले की ऐतिहासिक तलवार को महाराष्ट्र में वापस लाना हमारे लिए गर्व का क्षण है। इस तलवार के माध्यम से नई पीढ़ी का संबंध अपने गौरवशाली इतिहास से और गहरा हुआ है। यह तलवार नागपुर सहित राज्यभर में प्रदर्शित की जाएगी ताकि हिंदवी स्वराज्य के विस्तार की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि नागपुरकर भोसले घराने का इतिहास पराक्रमी और समृद्ध है, जिसे समाज तक अधिक से अधिक पहुंचाना जरूरी है। मुख्यमंत्री सांस्कृतिक विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने वासुदेव गोविंद आपटे और यशोधन जोशी द्वारा लिखित तथा कृष्णा पब्लिकेशन्स से प्रकाशित पुस्तक *‘मराठ्यांचा दरारा – नागपुरकर भोसले की बंगाल प्रांत पर मोहिमाएं’* का लोकार्पण किया।

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