नागपुरकर भोसले घराने का इतिहास गौरवशाली : फडणवीस

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सेना साहेब सुभा श्रीमंत राजे रघुजी भोसले की ऐतिहासिक तलवार को महाराष्ट्र में वापस लाना हमारे लिए गर्व का क्षण है। इस तलवार के माध्यम से नई पीढ़ी का संबंध अपने गौरवशाली इतिहास से और गहरा हुआ है। यह तलवार नागपुर सहित राज्यभर में प्रदर्शित की जाएगी ताकि हिंदवी स्वराज्य के विस्तार की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि नागपुरकर भोसले घराने का इतिहास पराक्रमी और समृद्ध है, जिसे समाज तक अधिक से अधिक पहुंचाना जरूरी है। मुख्यमंत्री सांस्कृतिक विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने वासुदेव गोविंद आपटे और यशोधन जोशी द्वारा लिखित तथा कृष्णा पब्लिकेशन्स से प्रकाशित पुस्तक *‘मराठ्यांचा दरारा – नागपुरकर भोसले की बंगाल प्रांत पर मोहिमाएं’* का लोकार्पण किया।

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गोवा के समुद्र तट पर परिवार के साथ बिताए भावनात्मक पल

वाह… गोवा… वाह !

गोवा की यह यात्रा शोर-शराबे से ज़्यादा स्मृतियों की शांति है। समुद्र की लहरें, माँ की यादें, पोते की ज़िद और परिवार के साथ बिताए पल—यह संस्मरण गोवा को महसूस करने की एक भावनात्मक कोशिश है।

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इंटरसिटी बस में यात्रा करती हुई युवा भारतीय महिला

बढ़ रहा महिला सोलो ट्रैवल, बस यात्राओं में बड़ा इजाफा

भारत में ट्रैवल का नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है, जहां जेन-ज़ी महिलाएं सोलो बस यात्राओं के जरिए स्वतंत्रता और नए अनुभवों की ओर कदम बढ़ा रही हैं. हाल ही की एक रिपोर्ट के अनुसार 2019 के बाद भारत में महिलाओं की इंटरसिटी बस यात्राओं में 136 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खास बात यह है कि इस बदलाव में छोटे शहरों की युवतियां भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं, जो पढ़ाई, काम और घूमने के लिए आत्मविश्वास के साथ यात्रा कर रही हैं

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अहाना को धर्मेंद्र की दौलत नहीं, ये विरासत चाहिए

मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की बेटी अहाना देओल ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें पिता की संपत्ति या दौलत में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने पिता की पहली कार, उनकी फिएट, को विरासत में चाहती हैं। उनका कहना था कि इस कार से जुड़े अनगिनत…

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पुणे बना ओपन लाइब्रेरी, 7 लाख लोगों ने पढ़ीं पुस्तकें

एक दिन के लिए ‘पुस्तकों की राजधानी’ बन गया. शहर के स्कूलों, कॉलेजों, ऑफिसों, मेट्रो, बस स्टैंड, धार्मिक स्थलों और आईटी पार्कों में लोगों ने एक साथ किताबें खोलकर ऐसा माहौल बनाया, मानो पूरा शहर एक विशाल ओपन लाइब्रेरी में बदल गया हो. ग्रुप रीडिंग की लगभग १०,००० तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गईं और आयोजन को राजेश पांडे, रमेश पाटील, योगेश शिंदे, स्वाति देशमुख, प्रिया जाधव के नेतृत्व में ‘शांतता.. पुणेकर वाचत आहे’ अभियान को बड़ी सफलता मिली. शाम ५ बजे तक १ लाख ३५ हज़ार से ज़्यादा लोगों ने किताबें पढ़ीं और फोटो अपलोड करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

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महिदपुर रोड में बहेगी संगीतमयी श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा

26 दिसंबर से 1 जनवरी तक चलेगा सात दिवसीय धार्मिक आयोजन सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे महिदपुर रोड- प्रस्तावित श्रीराम हनुमान मंदिर, महिदपुर रोड पर आगामी 26 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक भव्य एवं संगीत मयी श्रीमद्? भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है. कथा प्रवचन का दायित्व सुप्रसिद्ध कथा प्रवक्ता…

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लकड़ी की मेज पर खुली किताब और लैपटॉप के साथ किताबों और डिजिटल युग के भावनात्मक संबंध को दर्शाता दृश्य।

किताब दिल में, लैपटॉप हाथ में

‘किताब दिल में, लैपटॉप हाथ में’ कविता किताबों की आत्मीयता, काग़ज़ की खुशबू और डिजिटल दौर की तेज़ रफ़्तार के बीच छुपे भावनात्मक संघर्ष को व्यक्त करती है। यह रचना बदलते समय को स्वीकारते हुए भी दिल में बसती किताबों की अमिट जगह को संवेदनशील शब्दों में उकेरती है।

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जीत

हार को स्वीकार करने का साहस ही सच्ची जीत की शुरुआत होता है। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपना संयम और आत्मविश्वास बनाए रखता है, वही आगे चलकर मंज़िल तक पहुँचता है। रास्ते आज कठिन लग सकते हैं, पर यदि हौसलों से भरी कोशिश जारी रहे तो कल वही रास्ते सफलता की ओर ले जाते हैं। गिरना जीवन का स्वभाव है, पर हर बार गिरकर उठना और फिर आगे बढ़ना ही संघर्ष की असली पहचान है।

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व्यथा वृक्ष की…

कविता वृक्ष की पीड़ा और धैर्य का जीवंत चित्र खींचती है। गहरी जड़ों वाला यह वृक्ष कई अत्याचार और आघात सहकर भी खड़ा है। उसका कोमल तन और मन भले ही पत्ते-पत्ते, रेशा-रेशा झर गया हो, पर वह पूरी तरह टूटा नहीं। जर्जर होने के बाद भी वह आशा से भरा है कि उसकी शाखाओं पर फिर से नवकोपलें फूटेंगी, हरा-भरा जीवन लौटेगा।
वह स्वयं से प्रश्न करता है कि आखिर उसने क्या ग़लत किया था—सबको आसरा देकर, फल-फूल देकर, उदर-तृप्ति कराकर भी क्यों आहत होना पड़ा? पर साथ ही उसमें यह अटूट विश्वास है कि उसका अस्तित्व ही धरती के जीवन का आधार है। वह मनुष्यों को स्मरण कराता है—यदि वे उसे पोषित करेंगे तो बदले में वह उन्हें संरक्षण देगा।

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