छोटी कहानियों में बड़े अर्थ

रश्मि चौधरी का लघुकथा संग्रह ‘संवेदनाओं का स्पर्श’ समकालीन हिंदी लघुकथा को एक नई चेतस दिशा प्रदान करता है। ये लघुकथाएं केवल आक्रोश, टकराव या विरोध का आख्यान नहीं हैं, बल्कि इनमें मानवीय सहकार, संवेदनात्मक विस्तार और यथार्थ का सधा हुआ समन्वय देखने को मिलता है। संग्रह की रचनाएं जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों को बड़ी आत्मीयता और वैचारिकता के साथ प्रस्तुत करती हैं। कभी मनोविज्ञान की परतें खुलती हैं, तो कभी समाजशास्त्रीय संदर्भों का मूक आकलन होता है। ‘दुकानदारी’, ‘अन डू’, ‘सम्मान’, ‘मान्यताएं’ जैसी लघुकथाएं अपनी गहनता और प्रतीकों के माध्यम से पाठक के मन को छू जाती हैं। लेखिका की भाषा-संरचना और कथ्य विन्यास लघुकथा को संवेदना की ऐसी धरती पर स्थापित करते हैं, जहाँ विचार और अनुभूति दोनों का संतुलन है।”

Read More

परीक्षा

जन्म से शुरू हुई प्रतिस्पर्धा, रिश्तों की कसौटी, बच्चों की उड़ान और अंत में ईश्वर की अंतिम परीक्षा — यह कविता जीवन के हर पड़ाव को गहराई से छूती है।

Read More

असली दीवाली: दिखावे नहीं, परिवार की खुशहाली में

डाॅ उर्मिला सिन्हा प्रसिद्ध साहित्यकार, रांची (झारखंड) दीवाली का त्यौहार आ पहुंचा।गौरी साफ-सफाई, रंग-रोगन, पूजा की तैयारी… बेटे की प्रतियोगी परीक्षा, बिटिया का फाइनल एग्जाम… बूढ़े सास-ससुर की देखभाल… पति के नखरे अलग… क्या करे, क्या छोड़ दे।सीमित आमदनी, खर्चे हजार… नाते-रिश्तेदारों का स्वागत-सत्कार। एक आम मध्यमवर्गीय, संवेदनशील परिवार की यही कहानी।खैर, काम निबटते गए……

Read More
मुंबई के सांताक्रुज में निर्मला फाउंडेशन के कवि सम्मेलन में मंच पर उपस्थित कवि और अतिथि

मुंबई में सजी साहित्य की महफिल

मुंबई के सांताक्रुज में निर्मला फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह में साहित्यकारों, कलाकारों और समाजसेवियों का सम्मान किया गया।

Read More

यक्ष प्रश्न

डॉक्टर की क्लीनिक में बैठकर हर बार वही विचार उमड़ते हैं—काश कुछ फैसले अलग लिए होते, कुछ कदम गलत न उठाए होते। कभी-कभी मन इतनी थकान से भर जाता है कि लगता है जैसे सन्त-महात्माओं जैसा शांत, संयमित जीवन ही समाधान हो। पर तभी खुद से सवाल उभरता है क्या वे भी कभी बीमारी से अछूते रहे होंगे? कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जिनका उत्तर न तो किसी किताब में मिलता है, न किसी प्रवचन में…..

Read More
Softly lit close-up of two Indian hands gently reaching toward each other without touching, expressing emotional connection, trust, and respectful intimacy in a calm, warm-toned setting.

स्पर्श : संवेदना का संगीत

कुछ स्पर्श शरीर को नहीं, मन को छूते हैं। वे न वासना जगाते हैं, न भय बस भीतर कहीं भरोसे की लौ जला देते हैं। मर्यादा में बंधे ऐसे स्पर्श रिश्तों को शब्दों से पहले समझा देते हैं और इंसान को इंसान होने का एहसास कराते हैं।

Read More

क्या मैं सही हूँ?

कभी-कभी मन स्वयं से प्रश्न करता है—क्या मैं सही हूँ? मेरे विचार, मेरे निर्णय और मेरे कदमों की दिशा क्या वास्तव में उस सत्य की ओर जा रहे हैं, जिसे मेरी अंतरात्मा पहचानती है? सही और गलत का पैमाना हमेशा दुनिया की नजरों से नहीं तय होता। लोग कभी सराहना करेंगे, तो कभी आलोचना भी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मेरी आत्मा भीतर से शांत है, क्या मेरी अंतरात्मा मुझे स्वीकार करती है। यदि उत्तर “हाँ” है, तो वही मेरा सही होना है, क्योंकि अंततः सही और गलत का असली निर्णय बाहर से नहीं, भीतर से आता है।

Read More
अकेली वृद्ध माँ बैठी हुई, आँखों में आँसू और मन में पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा का प्रतीक

क्यों वृद्धाश्रम में जाऊँ

यह कविता उस माँ की पीड़ा को स्वर देती है, जिसने जीवन भर अपनी संतान को सींचा, सँवारा और बड़ा किया, लेकिन अंत में उसी से वृद्धाश्रम जाने का आदेश मिला। यह रचना समाज से एक करुण सवाल पूछती है क्या माँ का अब कोई ठौर नहीं?

Read More
एक व्यक्ति ध्यान में बैठा हुआ, अंधकार से प्रकाश की ओर बदलता वातावरण, आत्मचिंतन का प्रतीक

मंथन

“मंथन” एक गहन और विचारोत्तेजक हिंदी कविता है, जो वर्तमान समाज की विसंगतियों और मानवता के गिरते मूल्यों पर गंभीर प्रश्न उठाती है। यह कविता केवल समस्याओं को उजागर नहीं करती, बल्कि आत्मचिंतन और सुधार की दिशा में एक सशक्त संदेश भी देती है।

Read More

महिला काव्य मंच लखनऊ इकाई की काव्य गोष्ठी संपन्न

महिला सशक्तिकरण एवं साहित्य साधना को समर्पित महिला काव्य मंच (मध्य) की लखनऊ इकाई द्वारा मासिक काव्य गोष्ठी का सफल ऑनलाइन आयोजन दिनांक 29 अगस्त 2025 को किया गया.
इस साहित्यिक आयोजन की मुख्य अतिथि रहीं डॉ. स्वदेश मल्होत्रा (अध्यक्ष, महिला काव्य मंच, अयोध्या) तथा विशिष्ट अतिथि रहीं डॉ. गीता मिश्रा. कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. राजेश कुमारी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, शिक्षा मंच) के प्रस्तावना भाषण से हुआ. उन्होंने अपनी अध्यक्षीय उद्बोधन में मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए महिला काव्य मंच के उद्देश्यों और साहित्यिक गतिविधियों की सार्थकता पर प्रकाश डाला. उन्होंने लखनऊ इकाई की सक्रियता और निरंतरता की सराहना करते हुए सभी कवयित्रियों को बधाई भी दी.

Read More