इश्क सूफियाना
कुछ रिश्ते नाम, दूरी और मुलाकातों के मोहताज नहीं होते। वे दिल से नहीं, रूह से जुड़ते हैं। रूहानी प्रेम एक ऐसा सूफ़ियाना एहसास है, जहाँ दो आत्माएं एक-दूसरे की खुशी, दर्द और खामोशियों को बिना कहे समझने लगती हैं।

कुछ रिश्ते नाम, दूरी और मुलाकातों के मोहताज नहीं होते। वे दिल से नहीं, रूह से जुड़ते हैं। रूहानी प्रेम एक ऐसा सूफ़ियाना एहसास है, जहाँ दो आत्माएं एक-दूसरे की खुशी, दर्द और खामोशियों को बिना कहे समझने लगती हैं।
डाकिया हमारे बचपन और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। उनका नाम सुनते ही एक अलग ही दुनिया आंखों के सामने जीवंत हो उठती — खाकी वर्दी, साइकिल की खड़खड़ाहट और हाथों में थैला। वे सिर्फ़ पत्र और पार्सल नहीं लाते थे, बल्कि अपनों का प्यार, उम्मीद और आशीर्वाद भी अपने साथ लाते थे। इस लेख में हम उन दिनों की झलकियाँ साझा कर रहे हैं, जब हर चिट्ठी का इंतजार दिल की धड़कनें बढ़ा देता था और हर पार्सल में खुशी और उत्सुकता समाई होती थी।
हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित अंतरराष्ट्रीय संस्था हिंदी साहित्य भारती ने मुंबई, महाराष्ट्र में राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ की नई इकाई का गठन किया।
कार्यक्रम का आयोजन द प्रेसीडेंसी रेडियो क्लब में किया गया, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती संजना लाल ने की। महानगर कोलकाता से पधारी डॉ. सुनीता मंडल, अध्यक्ष, हिंदी साहित्य भारती राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ, ने सभी साहित्यकारों और कवयित्रियों का स्वागत करते हुए महिला प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली और उद्देश्यों को साझा किया।
एक नंगी ईंट की दीवार और उसके पास चूल्हा, जिस पर उपले की आँच में रोटियाँ सिकती हैं। माँ के पास चिमटा तो है, फिर भी कभी-कभी ऐसा लगता है कि उसके जीवन से कुछ पल चुराए जाएँ। उसकी तपती ज़िंदगी, खुरदरी हथेलियाँ और जीवन की सारी सिलवटें यह सब गहरी कहानियाँ बयां करती हैं। समय तो गुजर चुका है, लेकिन जो आँसू उसने छुपाए थे, उन्हें समझने और पोछने की इच्छा रहती है। यह एक नज़दीकी और भावनात्मक दृष्टिकोण है, जिसमें माँ के संघर्ष और उसके भीतर छुपी कोमलता दोनों ही सामने आती हैं।
उस दौर में जीवन के उपन्यास पर हस्ताक्षर करना इतना आसान नहीं था, जैसे आज है। मानो जैसे अंगारों पर चलना हो। फिर भी उसे सच बताना पड़ा और मुझे सच छुपाना पड़ा। वह एक संपूर्ण प्रेम-ग्रंथ था और मैं पाँच कोस की बदलती बोली। जीवन के कोरे कागज़ पर उसने मनमर्ज़ियाँ लिखीं और मैंने बंदिशें। कागज़ और स्याही किसी के पास नहीं थे, बस अनाम सी एक उड़ान थी। यक़ीन के साहिल पर वह ठहरा रहा और मैं वक़्त की नज़ाकत में बहती चली गई। उसने चक्रव्यूह की सलाखें तोड़ दीं, जबकि मैं सही और ग़लत के भँवर में उलझती रही। उसके लिए फ़ासले और फ़ैसले कम थे, मगर मेरे लिए वही बहुत भारी थे—कभी वक़्त के और कभी दहलीज़ के।
नवरात्रि का पर्व शक्ति और भक्ति का अद्वितीय संगम है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री का सुंदर दरबार सजता है, जिनकी आराधना से जीवन में ममता और वात्सल्य का संचार होता है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी का स्मरण किया जाता है, जो तप, साधना और भक्ति की प्रतीक हैं।
माँ चंद्रघंटा अपने अपार सौंदर्य और दिव्य छवि के साथ पीले वस्त्र धारण कर सिंह पर सवार होकर भक्तों को संकटों से मुक्त करती हैं। कूष्मांडा स्वरूप धारण करने वाली माँ के ध्यान से शोक, भय और अशुभता दूर होकर शुभ वरदान मिलता है। पंचम रूप में माँ स्कंदमाता के दर्शन से अद्भुत शांति और कृपा प्राप्त होती है।
लना हर उम्र के लिए फायदेमंद है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अलग-अलग आयु वर्ग के लिए वॉकिंग का समय अलग होता है? बच्चों को 60 मिनट, युवाओं को 30–45 मिनट और वरिष्ठ नागरिकों को 20–30 मिनट की वॉक की सलाह दी जाती है। सही अवधि में नियमित वॉक हृदय स्वास्थ्य, वजन नियंत्रण और मानसिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी है।
पुणे में आयोजित तीन दिवसीय छठे पुणे पर्यटन महोत्सव में प्रसिद्ध गायिका और सोलो ट्रैवलर डॉ. राधा मंगेशकर ने उद्घाटन किया. उन्होंने बताया कि यात्रा न केवल मन को आनंद देती है बल्कि आत्मविश्वास और सहनशीलता को भी बढ़ाती है. महोत्सव में महाराष्ट्र और भारत के ऐतिहासिक, धार्मिक और ऑफबीट पर्यटन स्थलों की झलक देखने को मिली. लगभग 70 टूरिस्ट कंपनियों के स्टॉल्स लगे, और युवाओं, परिवारों और यात्रा प्रेमियों को जानकारी दी गई. डॉ. मंगेशकर ने सोलो ट्रैवल के महत्व और व्यक्तिगत विकास में इसके योगदान पर जोर दिया. यह महोत्सव पुणेकरों के लिए निशुल्क खुला है और आने वाले सप्ताहांत तक जारी रहेगा, जिसमें कैलास मानसरोवर यात्रा, जंगल पर्यटन मार्गदर्शन और कॉर्पोरेट ट्रैवल सत्र भी होंगे.
कुछ भावनाएँ ऐसी होती हैं जो कही नहीं जातीं, लेकिन दिल की गहराइयों में अनवरत बहती रहती हैं — सिसकती हुई, दबी हुई, फिर भी महसूस होती हुई। ये धड़कनों में छिपे वो एहसास हैं जो न पूरी तरह अव्यक्त हैं, न पूरी तरह अभिव्यक्त। दिल मानो एक ऐसा प्रयाग है जहाँ हर भावना, हर याद, हर संबंध एकत्र हो जाता है — जैसे गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम।हाल ही में जन्मे एक मासूम से इश्क़ ने मन को कुंभ की तरह भीगो दिया है — वह भी मौन में, तप में, जल में और हवा के हर स्पर्श में। तेरी उपस्थिति जैसे हर तत्व में घुल गई है। इस भावनात्मक संगम में अब प्रेम और भक्ति एकसाथ बह रहे हैं। मन जैसे प्रयागराज बनकर इंद्रियों में शंखनाद कर रहा है — बुला रहा है, कि अब इस प्रवाह में तुम भी आ जाओ।
“मेरी प्यारी जनवरी” एक आत्मीय और भावुक गद्य है, जिसमें सर्दियों की ठंड, धूप की मिठास, नए संकल्पों की शुरुआत और समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदना को बेहद सहज शब्दों में पिरोया गया है।