इश्क सूफियाना
कुछ रिश्ते नाम, दूरी और मुलाकातों के मोहताज नहीं होते। वे दिल से नहीं, रूह से जुड़ते हैं। रूहानी प्रेम एक ऐसा सूफ़ियाना एहसास है, जहाँ दो आत्माएं एक-दूसरे की खुशी, दर्द और खामोशियों को बिना कहे समझने लगती हैं।

कुछ रिश्ते नाम, दूरी और मुलाकातों के मोहताज नहीं होते। वे दिल से नहीं, रूह से जुड़ते हैं। रूहानी प्रेम एक ऐसा सूफ़ियाना एहसास है, जहाँ दो आत्माएं एक-दूसरे की खुशी, दर्द और खामोशियों को बिना कहे समझने लगती हैं।
चलता चल राही” एक प्रेरणादायक कविता है, जो बताती है कि जीवन की राह में कांटे, बाधाएँ और संघर्ष आएँगे, लेकिन रुकना नहीं बस चलते रहना ही विजय का मार्ग है।
हर अपना हमेशा अपना नहीं रहता और हर सफर मंज़िल तक नहीं पहुँचता। ‘चलो छोड़ो भी…’ कविता टूटते भरोसे, बदलते रिश्तों और जीवन में समय के साथ आगे बढ़ने की बात कहती है।
डाॅ उर्मिला सिन्हा प्रसिद्ध साहित्यकार, रांची (झारखंड) दीवाली का त्यौहार आ पहुंचा।गौरी साफ-सफाई, रंग-रोगन, पूजा की तैयारी… बेटे की प्रतियोगी परीक्षा, बिटिया का फाइनल एग्जाम… बूढ़े सास-ससुर की देखभाल… पति के नखरे अलग… क्या करे, क्या छोड़ दे।सीमित आमदनी, खर्चे हजार… नाते-रिश्तेदारों का स्वागत-सत्कार। एक आम मध्यमवर्गीय, संवेदनशील परिवार की यही कहानी।खैर, काम निबटते गए……
जब मोबाइल और ई-मेल नहीं थे, तब खत ही रिश्तों की धड़कन हुआ करते थे। पोस्टकार्ड से लेकर लिफाफे तक, हर पत्र में सिर्फ़ खबर नहीं, पूरा जीवन लिखा होता था। यह कहानी उसी इंतज़ार, उस स्याही और उन भावनाओं की है, जो आज भी दिल को भिगो देती हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं वित्त केंद्र (आईबीएफसी) का होगा विकास पुणे/नागपुर,– नागपुर के शहरी परिदृश्य को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एन.एम.आर.डी.ए.) के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना के अंतर्गत नवीन नागपुर को एक योजनाबद्ध…
सोशल मीडिया के दौर में सच्ची और फर्जी खबरों के बीच का अंतर लगातार धुंधला होता जा रहा है। बिना प्रमाण-पत्र के स्वयं को पत्रकार बताकर कुछ लोग बेबुनियाद खबरें फैलाकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं, जिससे असली और जिम्मेदार पत्रकारिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जबकि सच्चा पत्रकार वही है जो निष्पक्षता, सत्य और सामाजिक दायित्व के साथ समाज और सरकार के बीच एक सेतु बनकर कार्य करता है।
“इश्क कीजिए” एक कोमल और संवेदनशील हिंदी कविता है, जो दिल की उदासी, यादों की दस्तक और अनायास जन्म लेने वाले प्रेम के एहसास को शब्द देती है। यह कविता बताती है कि इश्क केवल किसी और से नहीं, बल्कि खुद पर विश्वास रखने का भी नाम है।
हम अपने आप में बस एक पानी की बूँद जैसे हैं। कभी मिट्टी पर गिरकर उसमें समा जाते हैं, तो कभी किसी पत्ते पर टिककर उसकी शोभा बढ़ाते हैं। और जब लहरों से मिलते हैं, तो खुद सागर का रूप ले लेते हैं। हमारी पहचान इस पर नहीं है कि हम कौन हैं, बल्कि इस पर है कि हम किससे जुड़ते हैं।