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घर में उदास बैठा पिता और मोबाइल में व्यस्त बच्चे, बदलते पारिवारिक रिश्तों का दृश्य

बाप रे बाप

यह व्यंग्यात्मक लेख “बाप रे बाप” भारतीय समाज में “बाप” की बदलती छवि और उसकी सामाजिक स्थिति पर तीखा लेकिन हास्यप्रद कटाक्ष करता है। कभी परिवार का केंद्रबिंदु और अनुशासन का प्रतीक रहा “बाप”, अब अपने ही बच्चों और समाज के व्यवहार से हास्यास्पद स्थिति में आ गया है। बेटे बाप के नाम पर ऐश करते हैं, पर उसकी इज्जत नहीं रखते। सोशल मीडिया से लेकर सत्ता के गलियारों तक, हर कोई “बाप” बनने की होड़ में है — असली अर्थों में नहीं, बल्कि रुतबे के लिए। लेख एक गहरी सामाजिक विडंबना की ओर इशारा करता है, जहाँ बाप अब ATM, चेकबुक, और ज़रूरत पड़ने पर जेब से निकाली जाने वाली वस्तु बनकर रह गया है।

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पुणे में मूसलाधार बारिश के दौरान जलभराव, सड़क पर चलते वाहन और घने बादल

पुणे में बारिश ने तोड़ा 57 साल का रिकॉर्ड

पुणे में रिकॉर्ड बारिश ने 57 वर्षों का इतिहास बदल दिया है। जुलाई 2026 में महज 8 दिनों के भीतर महीने की औसत वर्षा पूरी हो गई। शहर में 357 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि चिंचवड़ में सामान्य से 295% अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।

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ऑनलाइन काव्य गोष्ठी

कविता, ग़ज़ल और नज़्म की रंगीन शाम

राष्ट्रीय साहित्य नवरत्न मंच के तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में देशभर के कवि-कवयित्रियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। गूगल मीट के माध्यम से हुए इस भव्य आयोजन में कविता, ग़ज़ल और नज़्म के जरिए प्रेम, समाज, नारी चेतना और देशभक्ति के विविध रंग देखने को मिले।

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नवरात्रि: भक्ति से शक्ति की यात्रा

“नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है। यह हमें हमारे भीतर की सुप्त शक्ति को पहचानने, हर कठिनाई में छिपे वरदान को देखने और आत्मविश्वास से अंधकार को मिटाने की प्रेरणा देता है।”

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कागज़ की कश्ती

कविता बचपन की उन मीठी यादों को जीवंत करती है जब बारिश में “कागज़ की कश्ती” सपनों का प्रतीक बन जाती थी। न चिंता थी, न भय—बस मासूमियत और आनंद था। अब वक्त बदल गया है; बारिश, दोस्त और वो बचपन सब पीछे छूट गए हैं। “कागज़ की कश्ती” आज सिर्फ उन सुनहरे दिनों की प्यारी याद बनकर रह गई है।

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युद्ध की पृष्ठभूमि में शांति और प्रेम की कामना करती भारतीय स्त्री का भावपूर्ण यथार्थवादी दृश्य, हिंदी कविता का प्रतीकात्मक चित्र।

युद्ध की अरगनी टटोलता स्त्री का प्रेम

युद्ध की भयावहता के बीच एक स्त्री का मन प्रेम, विश्वास और शांति का स्वप्न संजोए रहता है। यह कविता हिंसा के विरुद्ध मानवीय करुणा, सोलह शृंगार की कोमलता और एक नए उजास भरे युग की आकांक्षा को बेहद संवेदनशील ढंग से व्यक्त करती है।

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तेरे जाने के बाद कविता

तेरे जाने के बाद

“तेरे जाने के बाद” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो किसी अपने के बिछड़ने के बाद जीवन में आए बदलावों को दर्शाती है। इसमें जिम्मेदारियों के बीच छिपे दर्द, घर के खाली कोने, यादों की चुप्पी और समय की सच्चाई को बेहद संवेदनशीलता से व्यक्त किया गया है। यह कविता बताती है कि समय घाव भरता नहीं, बल्कि जीना सिखाता है। मुस्कान के पीछे छिपा खालीपन और भीतर की थकान हर उस व्यक्ति की भावना है जिसने किसी खास को खोया है। यह कविता दर्द के साथ जीवन की परिपक्वता भी सिखाती है।

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उफनते दरिया, टूटते पहाड़ : क़ुदरत से छेड़खानी का परिणाम

पहाड़ों पर ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी गई। मानसून का इंतजार कर रहे इलाकों में अब प्रलय का मंजर है। उफनती नदियों ने अपनी हुंकार से पहाड़ों को रेत की तरह तोड़ डाला है। चट्टानें दरक रही हैं, रास्ते धंस रहे हैं और जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से धरती जलमग्न होती जा रही है और पानी का तांडव जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रहा है।

मैदानों में भी हालात कम भयावह नहीं हैं। सड़के सैलाब में तब्दील हो रही हैं, लोग अपने घरों से विस्थापित हो रहे हैं और बेबस होकर जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। हर ओर त्राहि-त्राहि मची है।

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