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देखो होली आई है…

होली के रंगों में सराबोर दंपति, हवा में उड़ता गुलाल और पृष्ठभूमि में सुनहरी फागुन की रोशनी “रंगों के इस उत्सव में भी सबसे गहरा रंग है प्रियतम की याद का।”

आशी प्रतिभा, प्रसिद्ध लेखिका, ग्वालियर (मध्यप्रदेश)

इस मस्ताने फगुआ संग
याद प्रियतम की आई है।

देखो, होली आई है संग,
हमें याद तुम्हारी आई है।

जब-जब रंग लगाया तुमने,
प्रेम की बात हृदय में आई है।

कब से न देखा तुमको हमने,
मिलने की घड़ी अब आई है।

आकर अब मोहे अंग लगा लो,
फागुन में मधुरिम-सी पुरवाई है।

नीला-पीला, ये लाल-गुलाबी रंग,
हाँ, फागुन में याद तुम्हारी आई है।

गीत, ग़ज़ल, ये संगीत तुम्हारे,
हुक हृदय में ये उठ आई है।

अब न रह पाएँगे तुम बिन हम,
तुमको ही रंगने ये होली आई है।

कितने सखा आए हमें रंग लगाने,
हमें न संग किसी के होली भायी है।

आन मिलो अब तुम ही, प्रियतम,
देखो फागुन लौट न जाए याद तुम्हारी आई है।

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