रंगों को मलाल है..
होली के रंग खुशियों के प्रतीक माने जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ये रंग विरह की पीड़ा भी बयान कर देते हैं। यह कविता प्रेम, दूरी और यादों के भाव को रंगों के प्रतीक के माध्यम से व्यक्त करती है जहां रंग भी जैसे पूछते हैं, साथ क्यों नहीं।

होली के रंग खुशियों के प्रतीक माने जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ये रंग विरह की पीड़ा भी बयान कर देते हैं। यह कविता प्रेम, दूरी और यादों के भाव को रंगों के प्रतीक के माध्यम से व्यक्त करती है जहां रंग भी जैसे पूछते हैं, साथ क्यों नहीं।
यह कविता होली के रंगों में डूबी प्रेम और प्रतीक्षा की कथा कहती है। फागुन की पुरवाई, लाल-गुलाबी रंग और प्रियतम की स्मृतियाँ सब मिलकर विरह को और भी मधुर बना देते हैं। यह रचना उत्सव के बीच छुपी प्रेम की तड़प को खूबसूरती से अभिव्यक्त करती है।