शब्दकोष बना… पर मान्यता नहीं मिली!
निमाड़ी भाषा को लोकभाषा का दर्जा दिये जाने के लिये दशकों से संघर्ष कर रहे जगदीश जोशीला (खरगोन) को इस बात का दुख है कि सरकार निमाड़ी की अनदेखी करती आ रही है। अब तक 56 से अधिक किताबों में 28 निमाड़ी भाषा में लिख चुके साहित्यकार जोशीला को भले ही इस भाषा का शब्दकोष बनाने पर पद्मश्री से सरकार ने सम्मानित किया हो किंतु उनके मन में टीस है कि मालवी सहित अन्य चार भाषाओं को तो लोकभाषा मान लिया गया लेकिन निमाड़ी आज भी बोली ही मानी जा रही है।
