कुछ भी कहो…
“कुछ भी कहो” एक प्रेरक कविता है जो स्त्री की शक्ति, सहनशीलता, संघर्ष और आत्मविश्वास को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि नारी केवल नाम नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का स्वरूप है।

“कुछ भी कहो” एक प्रेरक कविता है जो स्त्री की शक्ति, सहनशीलता, संघर्ष और आत्मविश्वास को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि नारी केवल नाम नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का स्वरूप है।
“मैं फिर जीत गई” एक संवेदनशील कहानी है, जिसमें माया और मिलिंद के रिश्ते, सपनों को उड़ान देने वाला प्रेम, और जीवन की कठिन घड़ी में विश्वास की जीत को खूबसूरती से उकेरा गया है।
“देह पर ठहरा मौसम!!” एक ऐसी संवेदनशील कविता है जिसमें प्रेम के प्रथम स्पर्श, स्मृतियों की गर्माहट और आत्मा तक उतरती अनुभूतियों को बेहद कलात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है।
‘सीधा सा गणित’ एक मार्मिक पारिवारिक कहानी है, जिसमें बहू के परिश्रम को अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन ससुर के स्नेहपूर्ण व्यवहार से रिश्तों की असली गरिमा सामने आती है। यह कहानी परिवार, सम्मान और प्रेम का सुंदर संदेश देती है।
लिख दे कासिद लिख दे इक खत’ प्रेम, विरह और समर्पण की मधुर अभिव्यक्ति है। इसमें एक विरहिणी नायिका अपने प्रियतम तक मन की व्यथा, प्रेम की स्मृतियाँ और जीवन की अधूरी अनुभूतियाँ पहुँचाने की विनती करती है।
“मोहन से महाकालः कृष्ण और नृसिंह” एक प्रभावशाली भक्ति कविता है, जो भगवान विष्णु के दो महान अवतारों श्रीकृष्ण और भगवान नृसिंह का सुंदर चित्रण करती है। एक ओर श्रीकृष्ण प्रेम, करुणा और गीता ज्ञान के प्रतीक हैं, तो दूसरी ओर नृसिंह अधर्म के विनाश और भक्त रक्षा के प्रतीक हैं। कविता बताती है कि ईश्वर समय और परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग रूप धारण करते हैं। यह रचना भक्ति, शक्ति और धर्म रक्षा का अद्भुत संदेश देती है, जो पाठकों के मन में श्रद्धा और उत्साह भर देती है।
अर्पणा सिंह “अर्पी” , रांची बड़ी मुश्किलों से मिल पाती है निजात,मज़दूरों को पाने में रोटी दो जून की सौगात। बैशाख की दोपहरी की धूप या बहती लू,पसीने से लथपथ हो या हो तपती भू।तन ढकने को वसन और मिटाने को भूख,इसी की आपूर्ति में रहते हैं हर पल मशगूल। बड़ी मुश्किलों से मिल पाती…