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बरसात

बरसात और आँसुओं में छिपे दर्द को दर्शाती हिंदी कविता बारिश थम जाती है, लेकिन आँखों की नमी हमेशा नहीं जाती।
geeta mittal

गीता मित्तल, मेरठ

रात आँसुओं की बरसात हुई,
न जाने कैसी बात हुई।
मन के मन में दफ़्न रहे सब,
खामोशी से फिर मुलाकात हुई।

न कोई शिकवा, न फरियाद हुई,
दर्द की अपनी आवाज़ हुई।
सीने में दफ़्न किए प्रश्न सभी,
मगर होंठों पर मुस्कान हुई।

भीगी पलकों ने सब बोल दिया,
लबों ने सच से पर्दा किया।
दीवारों ने मेरी सिसकियाँ सुनीं,
अपनों से मगर कोई बात न हुई।

जिसे पुकारा समझकर अपना,
उसी से चुप रहना सीख लिया।
बारिश थम गई जब सुबह हुई,
पर आँखों की नमी कहाँ गई?

जग ने देखा—चेहरा हँसता,
रात भर किस दर्द को ढोया?
पूछा नहीं किसी ने आकर,
कितना नीर आँखों ने खोया?

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