सिद्धवट और गयाकोठा पर श्रद्धालुओं की भीड़

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे
उज्जैन। पितृपक्ष शुरू होते ही मध्यप्रदेश के उज्जैन में पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। शनिवार को पूर्णिमा तिथि पर गयाकोठा और सिद्धवट क्षेत्र में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। कई लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में तर्पण और पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचे। गयाकोठा पर तड़के से ही तर्पण का सिलसिला शुरू हो गया था, जो दोपहर तक चलता रहा। श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर पूजा-अर्चना की और दूध, जल तथा काले तिल अर्पित किए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान श्रद्धालु अपने पितरों से कृपा और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
प्रतिपदा के श्राद्ध की तैयारी
पूर्णिमा के बाद रविवार को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रतिपदा उन पितरों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिनका निधन प्रतिपदा तिथि को हुआ हो। इस दिन परिवार की ओर से दिवंगत परिजनों के निमित्त भोजन अर्पित करने और धूप देने की परंपरा है।प्रतिपदा श्राद्ध में घर की देहरी अथवा द्वार की पूजा का भी विधान बताया गया है। मान्यता है कि इसके माध्यम से परिवार अपने पूर्वजों का पूरे पितृपक्ष के दौरान घर में स्वागत करता है।
तीन पीढ़ियों के पूर्वजों का स्मरण
सिद्धवट से जुड़े धार्मिक महत्व के कारण पितृपक्ष के दौरान यहां विशेष रूप से तर्पण किया जाता है। पंडित श्याम पंचोली के अनुसार, धार्मिक परंपरा में पितृयज्ञ को विशेष महत्व दिया गया है। प्रतिपदा के श्राद्ध में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके निमित्त तर्पण करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार इस अवसर पर तीन पीढ़ियों तक के पूर्वजों का स्मरण किया जा सकता है।
दूसरे राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
उज्जैन में पितृपक्ष के दौरान होने वाले श्राद्ध और तर्पण कर्म का महत्व केवल स्थानीय श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक कर्मकांड के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में पितृपक्ष के दौरान गयाकोठा और सिद्धवट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।
धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं से जुड़ी इन गतिविधियों के बीच उज्जैन एक बार फिर पितृ स्मरण और श्राद्ध कर्म के प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में दिखाई दे रहा है।

ज्ञानवर्धक आलेख,पढ़ने के साथ मन में एक सवाल भी उभरा और कुछ एक खबरें…कुछ एक समाचारों की कतरनें दिमाग में कुलबुलाने लगी…वे संताने कैसी होती होंगी जो जीते जी अपने मां पिता की ज़िंदगी को लालच और लापरवाही की वजह से नर्क बना देती हैं।