पितरों के तर्पण के लिए उज्जैन में उमड़ी आस्था
पितृपक्ष शुरू होते ही उज्जैन के सिद्धवट और गयाकोठा पर तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची। पूर्णिमा तिथि पर सुबह से दोपहर तक धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे।

पितृपक्ष शुरू होते ही उज्जैन के सिद्धवट और गयाकोठा पर तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची। पूर्णिमा तिथि पर सुबह से दोपहर तक धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे।
पितृपक्ष का यह सोलह दिवसों का पर्व पूर्वजों की स्मृति और श्रद्धा का विशेष समय है। श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। वेद, उपनिषद और गीता में भी यही बताया गया है कि आत्मा अजर-अमर है और श्राद्ध से हमें पुण्य मिलता है। कौए और गौ सेवा का विधान पितृपक्ष को और भी पावन बना देता है।