वंदे भारत स्लीपर में विमान जैसा सफर

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे
नई दिल्ली
लंबी दूरी की रेल यात्रा में यात्रियों को आराम, निजता और आधुनिक सुविधाओं का नया अनुभव देने की तैयारी है। भारतीय रेल की वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि रातभर के सफर में भी यात्रियों को प्रीमियम विमान जैसी सुविधाओं का अहसास हो सके। भारतीय और रूसी तकनीक के सहयोग से तैयार हो रही इस ट्रेन के पहले प्रोटोटाइप का दिसंबर में भारतीय पटरियों पर परीक्षण प्रस्तावित है। सभी तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद ही इसका नियमित संचालन शुरू किया जाएगा।यह परियोजना केवल नई ट्रेन शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबी दूरी की रेल यात्रा में यात्री सुविधाओं, कोच निर्माण और रखरखाव की तकनीक को आधुनिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
1,920 कोच के निर्माण की योजना
भारतीय रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) और रूस की प्रमुख रोलिंग स्टॉक निर्माता कंपनी ट्रांसमाशहोल्डिंग (टीएमएच) के संयुक्त उद्यम काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस के तहत कुल 1,920 कोच यानी 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट तैयार किए जाएंगे।इस मेगा परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14,400 करोड़ रुपये है। परियोजना के अंतर्गत अगले 35 वर्षों तक ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी संयुक्त उद्यम के पास रहेगी। इससे ट्रेन के निर्माण के साथ-साथ लंबे समय तक तकनीकी देखरेख और परिचालन संबंधी गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया जाएगा।
लातूर में आकार ले रहा आधुनिक ट्रेनसेट
महाराष्ट्र के लातूर स्थित मराठवाड़ा रेल कोच फैक्टरी को इस परियोजना के लिए आधुनिक असेंबली लाइनों और अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। यहीं पहला 16 कोच वाला प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है, जिसे परीक्षण के लिए रेलवे को सौंपा जाएगा।इस परियोजना से कोच निर्माण में आधुनिक तकनीक, औद्योगिक क्षमता और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारतीय-रूसी साझेदारी के माध्यम से वैश्विक आपूर्ति शृंखला और रोबोटिक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
निजी केबिन से लेकर हॉट-वॉटर शावर तक
वंदे भारत स्लीपर को यात्रियों की रात की यात्रा को अधिक आरामदायक बनाने के उद्देश्य से डिजाइन किया जा रहा है। इसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ निजता और शोर नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रस्तावित प्रमुख सुविधाएं-
एसी प्रथम श्रेणी में हॉट-वॉटर शावर की सुविधा।
अधिक निजता वाले आधुनिक केबिन और प्रीमियम इंटीरियर।
यूरोपीय तकनीक पर आधारित टच-स्क्रीन केबिन कंट्रोल।
बेहतर साउंडप्रूफिंग और नॉइज इन्सुलेशन।
स्वचालित दरवाजे और एम्बिएंट लाइटिंग।
बायो-वैक्यूम टॉयलेट और जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली।
इन सुविधाओं का उद्देश्य यात्रियों को लंबी दूरी के सफर में अधिक सुविधाजनक और शांत वातावरण उपलब्ध कराना है।
180 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगा परीक्षण
ट्रेन के प्रोटोटाइप पर रेलवे अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा तकनीकी और सुरक्षा मानकों के अनुरूप कठोर परीक्षण किए जाएंगे। प्रस्तावित ट्रायल के दौरान ट्रेन को 110 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार पर परखा जाएगा।
रूसी कंपनी टीएमएच को ट्रांस-साइबेरियन रेल नेटवर्क के लिए ट्रेन निर्माण का व्यापक अनुभव है। उसकी हाई-ड्यूरेबिलिटी बोगी तकनीक को भारतीय रेल की आवश्यकताओं के अनुरूप इस्तेमाल किया जा रहा है। परियोजना से जुड़े विवरण के अनुसार, ट्रेन को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर भी अपेक्षाकृत शांत और आरामदायक सफर देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
वंदे भारत स्लीपर का वास्तविक यात्री अनुभव हालांकि परीक्षण, सुरक्षा मंजूरी और नियमित परिचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
लंबी दूरी की रेल यात्रा में बदलाव की तैयारी
वंदे भारत स्लीपर परियोजना भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की उस दिशा को दर्शाती है, जिसमें तेज गति के साथ यात्रियों की सुविधा, बेहतर तकनीक और दीर्घकालीन रखरखाव को एक साथ जोड़ा जा रहा है। यदि प्रस्तावित परीक्षण और सुरक्षा प्रक्रियाएं सफल रहती हैं, तो आने वाले समय में लंबी दूरी के रेल यात्रियों को रात के सफर में अधिक आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
