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एहतियात कैसी ?

सपने सदियों से कल्पना के आसमान में उड़ान भरते आए हैं और हर बार यथार्थ की धरती पर लौटकर हमें यही सिखाते हैं. जब दिल सच्चा हो, तो एहतियात की कैसी गुंजाइश? एक मुट्ठी आसमान, शबनम का छोटा-सा कतरा इन छोटी-सी चीज़ों में भी प्रेम दरिया बनकर उमड़ आता है।

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मन के भाव..

न के भीतर जन्म लेने वाले भाव ही रचना का आधार बनते हैं। रचनाकार हो, कलाकार हो या चित्रकार—हर सृजन उसी सूक्ष्म अनुभूति से आकार पाता है, जो मन में आहिस्ता से जन्म लेती है।
प्रकृति और परमात्मा ने इस सृष्टि में संतुलन रचा, पर जब मनुष्य अपने ही खुमार और कामना में डूब जाता है, तो यही संतुलन टूटने लगता है। जल, वायु और धरती का दूषित होना किसी बाहरी शत्रु की नहीं, बल्कि मानव की अपनी भूल की कहानी है।

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फूलों की गुफ़्तगू…

फूलों की महक में जैसे कोई नर्म-सा सवाल छुपा था। हम रुके तो उन्होंने आहिस्ता से गुफ़्तगू शुरू कर दी। हमने भी दिल का हाल कह दिया. वो बातें, जो बरसों से किसी को न बताई थीं। अजीब ये हुआ कि हमारी हर बात पर फूल और भी महकने लगे, मानो मोहब्बत ने उन्हें भी अपनी गिरफ़्त में ले लिया हो। अब बाग़ की हर कली यूँ मुस्कुराती है, जैसे हमारी रूह से उनका कोई पुराना नाता हो।

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स्कूटी वाली..

आज औरतें रॉकेट से लेकर एयरप्लेन तक उड़ा रही हैं, और फिर भी कुछ लोग स्कूटी चलाने पर सवाल उठाते हैं। सच तो यह है कि समस्या लड़कियों की ड्राइविंग नहीं, बल्कि कुछ लोगों की नीयत और सोच में है। हम औरतें हवा में अपने पंख फैलाकर आगे बढ़ती रहेंगी .किसी को मिर्ची लगे तो लगे।

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अधूरे पन्नों का सफ़र

मन अपनी ही दिशा में चल पड़ा अनजान रास्तों पर, आशाओं की छोटी-सी गठरी लिए। पीछे छूटती भीड़ के चेहरों में भावनाओं का तूफान था, पर आगे अभी कई पन्ने लिखे जाने बाकी थे। अल्पविरामों की इस यात्रा में पूर्ण विराम कहीं दूर, किसी नए मोड़ पर इंतज़ार करता दिखा।”

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रंगों से सजा जीवन

लाल बिंदी की ममता हो या आसमां का नीला सुकून — हर रंग जीवन को एक नई दिशा देता है। हर रंग अपनी कहानी कहता है, और इन्हीं रंगों से जीवन सच में पूर्ण बनता है।”

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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट में  जाम

वाहनों की 8 से 10 किलोमीटर लंबी कतारें  लोणावाला: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट में शनिवार तड़के से ही भारी यातायात जाम लगा हुआ था. मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की 8 से 10 किलोमीटर लंबी कतारें लगी थीं. यह जाम लगभग नियंत्रित होने ही वाला था कि शनिवार दोपहर लगभग 12 बजे एक चलती रेनॉल्ट…

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•••प्रेमानंदजी ने लुटाए आंसुओं के मोती

राधारानी के परम भक्त-वृंदावन वाले संत प्रेमानंद जी के प्रवचनों के दीवाने तो पूरे विश्व में हैं। वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम में उनके दर्शन की एक झलक पाने को ब्रह्म मुहूर्त से हजारों श्रद्धालु जुट जाते हैं। ऐसे माहौल में खुद प्रेमानंद जी इंदौर के श्रद्धालु अतुल तिवारी परिवार को मिलने का समय दिया, उनकी मंत्रमय शंख ध्वनि को एकांत में सुना और सुनते-सुनते भाव विह्वल हो गए।

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A lone figure standing at the edge of a quiet riverbank during early dawn, soft golden-blue light reflecting on the water. The person looks contemplative, gazing at gentle ripples as if questioning life’s truths. Surrounding nature appears symbolic—distant mountains, drifting

जीवन-मंथन

जीवन की हर बढ़ती घड़ी में मन बार-बार सवाल करता है सुख और दुख के इस लंबे सफ़र में हमने कितना देखा, क्या खोया और क्या पाया। माया अपनी चकाचौंध से हमें छलती रहती है, सत्ता और वैभव के प्रलोभन दिखाती है, और इन्हें पाने की चाह में हम अनगिनत अंधेरों से गुजरते हैं।

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निर्लज्ज…

हर सुबह रिनी को वही काले-कलूटे अधेड़ की घूरती नज़रें तड़पा देती थीं। आज गुस्सा चरम पर था. बस पहुँचकर उसने राहत की साँस ही ली थी कि ड्राइवर बोला, “रघु भैया कह गए हैं, आप सीढ़ियाँ चढ़ जाएँ तभी बस स्टार्ट करना… अकेली रहती हैं, सुरक्षित नहीं है न।”सुनकर रिनी ठिठक गई“तो इसलिए वो मुझे घूरता था…”
ड्राइवर की अगली बात ने जैसे उसके भीतर कुछ तोड़ दियारघु अपनी बेटी की दर्दनाक मौत के बाद हर लड़की पर निगरानी रखता था।
पश्चाताप से भरी रिनी ने सीढ़ियाँ चढ़ते हुए पलटकर देखा बस धीरे से घरघराती हुई आगे बढ़ चुकी थी।

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