LIVE WIRE NEWS NETWORK

कर्म की सीख…

सफलता आस्था को और प्रबल कर देती है . पंडित जी ने दोनों के जन्मांक देखें और पहले लड़के से कहा – कि वह इस बार अवश्य अधिकारी बन जाएगा और दूसरे लड़के से कहा- तुम्हारे ग्रह नक्षत्र कमजोर हैं, इसलिए तुम्हें किसी अन्य व्यवसाय पर ध्यान देना चाहिए.
१० वर्ष की आस्था भविष्य के आकलन को समझ नहीं पाती, परंतु वह दादा से कहती है कि मेरे विद्यालय में यह बताया जाता है, कि परिश्रम से भाग्य बनता है .आप सभी को परिश्रम से विमुख क्यों कर रहे हो?

Read More

ख़त अपने नाम…

आज का खयाल सीधा दिल को छू गया—क्यों न खुद से ही अपनी कीमत पूछी जाए, बजाय दूसरों की नज़रों में ढूँढ़ने के। क्यों न एक ख़त खुद को लिखा जाए, जिसमें अपने ही बचपन की हँसी, अपनी ही रंगीन तितली-सी चंचलता, और अपनी ही खुशबू को फिर से महसूस किया जाए। जीवन की भाग-दौड़ में खोकर हम खुद को सँवारना भूल जाते हैं, लेकिन जब खुद से मुलाक़ात होती है, तो एहसास होता है कि सबसे बड़ा ख़िताब, सबसे सुंदर परिभाषा, हमेशा से हमारे अपने ही नाम थी।

Read More

भंँवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राज कुंँवर….

मेरे जीवन की वाड़ी, जिसे मैंने प्रेम और समर्पण से सींचा, फूलों-सी महकी और पत्तों-सी निखरी। भौंरे उसकी मिठास में आकर्षित होकर अपने हिस्से का रस ले गए। मैंने जिन लोगों को अपना मानकर आगे बढ़ने का हिस्सा बनाया, उनका साथ भी किसी उद्देश्य से था—पर वे सगे नहीं थे, और समय ने उनके असली चेहरे दिखा दिए। उनकी ज़रूरतें और इच्छाएँ अधिक थीं, और जब तक मैं काम आता, वही काफी था। फिर भी, हौसलों को बुलंद रखकर, नेक काम करके, आगे बढ़ जाना ही सही राह है।

Read More

तेरी यादों का शहर

यह दिल तेरी यादों से पीछा नहीं छुड़ा पाता, जैसे हर गली, हर मोड़ पर वही पुराना चेहरा इंतज़ार में खड़ा हो। दिल इतना सख़्त है कि आँसू तक नहीं निकलते, और तेरे मोहल्ले से दूर होकर भी जीने का ख्याल अधूरा लगता है, क्योंकि मेरे दिल का शहर कहीं और बसता ही नहीं। तेरी यादों की गलियों में भटकते हुए सोचता हूँ—इन तमाम यादों में कभी मेरा भी नाम क्यों नहीं आता।

Read More

सृष्टि रचयिता : नारी      

नारी को अबला कहना उसके अस्तित्व के साथ अन्याय है। वह सृष्टि की रचयिता, संवेदना की मूरत और असीम शक्ति की प्रतीक है। धूप, सर्दी, गर्मी और जीवन के हर थपेड़े सहकर भी वह संसार में सौंदर्य और संतुलन भरती है। कभी दुर्गा, कभी चंडी, वह मानव जाति का अभिमान है। फिर भी इतिहास में सीता, द्रौपदी और गांधारी जैसी अनेक नारियां अन्याय सहने को विवश क्यों हुईं? क्या परिवार का संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ उसी की है? सवाल यही है कि हर नारी रानी लक्ष्मीबाई या रानी दुर्गावती की तरह साहसी और प्रतिकार करने वाली क्यों नहीं बन पाती।

Read More

 पुणे में  ‘उगम’ संगीत कार्यक्रम17 अगस्त को

प्रसिद्ध हारमोनियम वादक तन्मय देवचके की स्वरानुजा संगीत अकादमी की और से रविवार, 17 अगस्त 2025 को ‘उगम’ कार्यक्रम का चौथा संस्करण आयोजित किया जाएगा । यह कार्यक्रम तिलक रोड के न्यू इंग्लिश स्कूल के गणेश हॉल में सुबह 10 बजे से शुरू होगा। कार्यक्रम सभी के लिए निःशुल्क रहेगा और पहले आने वाले रसिकों को प्राधान्य इस आधार पर कार्यक्रम के लिए प्रवेश दिया जायेगा। कुछ सीटें आमंत्रितों के लिए आरक्षित रहेंगी।
इस कार्यक्रम में तन्मय देवचके के दुनिया भर के छात्रों की विशेष प्रस्तुतियाँ होंगी, जो अपनी हारमोनियम कौशल का प्रदर्शन करेंगे। तन्मय देवचके के वरिष्ठ छात्र निलय साळवी और अथर्व कुलकर्णी तबले पर अनीश थत्ते के साथ एकल हारमोनियम वादन करेंगे।

Read More

अब 31 अक्टूबर तक सिर्फ 75 रुपये में देख सकेंगे शिवसृष्टि

छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष और गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाली शिवसृष्टी थीम पार्क में रियायती दरों का आनंद अब 31 अक्टूबर तक लिया जा सकेगा। 15 मई से शुरू हुई इस पेशकश के बाद तीन महीनों में 1.5 लाख से अधिक लोगों ने यहां आकर शिवकाल का अद्भुत अनुभव किया। जनता की भारी मांग और अभय भुतड़ा फाउंडेशन के 75 लाख रुपये के अतिरिक्त सहयोग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
महाराजा शिवछत्रपति प्रतिष्ठान के ट्रस्टी एवं शिवसृष्टी परियोजना के अध्यक्ष जगदीश कदम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अभय भुतड़ा फाउंडेशन पहले भी 50 लाख रुपये का दान दे चुका है।

Read More

अब मैं खाली हूँ…

भावनात्मक टूटने और भीतर के खालीपन को मार्मिक ढंग से चित्रित है। शुरुआत में बहुत समझाने, सवाल करने और दूरी मिटाने की कोशिश की, लेकिन समय के साथ शब्द थक गए, मन बुझने लगा और शिकायतें भीतर ही दब गईं। अब उसके दिन रसोई की भाप, बरामदे की धूल और घड़ी की टिक-टिक में गुजरते हैं—साथी के साथ नहीं, बल्कि अकेलेपन में।
जब साथी पुरानी यादों और अधूरे वादों के साथ लौटता है, तो भीतर कोई उत्साह या उम्मीद नहीं जागती। आँगन का चाँद, दीपक और हथेलियों का उजाला बहुत पहले खो चुके हैं। वक्ता अब खुद को एक खाली घर मानती है, जहाँ साथी महज़ मेहमान है और प्रेम एक पुरानी वस्तु बनकर कहीं सुरक्षित रख दिया गया है।

Read More

मन का अंतरिक्ष… 

यह अंश गहन रूपकों के माध्यम से मन के भीतर उमड़ते भावों और उनके क्रमिक शांत होने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
मन के अंतरिक्ष में उल्काओं की तरह तीव्र वेग से बहते विचार और भावनाएँ कई बार टकराव और घर्षण की स्थिति पैदा करते हैं, लेकिन समय के साथ उनकी गति धीमी पड़ जाती है। यह ठीक वैसे ही है जैसे पहाड़ों और घाटियों को चीरती कोई नदी, समतल पर आकर शांत और स्निग्ध हो जाती है।
अंत में, यह रूपक जीवन के उस क्षण से जुड़ता है जब उत्साह और उमंग से भरी नई नवेली दुल्हन, अपने ही आंगन में चुपचाप प्राजक्त के फूल-सी कोमलता के साथ ठहर जाती है और भीतर गहरी शांति महसूस करती है।

Read More

 विश्वास…

जब व्यक्ति अपने विवेक पर अटूट विश्वास रखता है और परिस्थितियों से लड़ने का साहस जुटाता है, तब वह कठिन परिश्रम और अनुशासन के पालन से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। धैर्य और आशा का संबल, असफलताओं से न घबराना और सही दिशा में सतत प्रयास करना सफलता की गारंटी बनते हैं। समयबद्धता का सम्मान, ज्ञान पर भरोसा और हौसला बनाए रखना, मुश्किल घड़ियों में भी व्यक्ति को झुकने नहीं देता। अच्छे कर्मों से व्यक्ति का नाम रोशन होता है, और जब लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहता है, तो सफलता की राह स्वतः प्रशस्त हो जाती है।

Read More