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एंटीडाट

मधु चौधरी, लेखिका, बोरीवली (मुंबई)

शिक्षा नीति के हुए थे शिकार,
शायद इसीलिए अब कर रहे हैं शिकार।
बीमारों की यूँ तो करते हैं सेवा,
पर नज़र कुछ की सेवा पे, कुछ की मेवा पे।

करते तो हैं इलाज बीमारी का,
पर साथ ही कर देते हैं इलाज आपकी जेब का।
कुछ वाकई भगवान हैं,
तो कुछ इंसान के भेष में बैठे शैतान हैं।

दवा से जो मुमकिन हो इलाज,
वहाँ भी कैंची चलाने से नहीं आते बाज।
पहले जो डिग्री के नाम पर लूटे गए,
अब वही हाथ में डिग्री ले लूट रहे।

उठा रहे जो फायदा मज़बूरी और बीमारी का,
भूल गए कि वो भी हो सकते हैं शिकार बीमारी का।
अब चीर-फाड़ हो इन शिक्षा नीतियों की,
कि जनरल केटेगरी भी अब आरक्षण माँगे।

आओ, एंटीडाट तलाशें…
लालच की इस बीमारी का!

One thought on “एंटीडाट

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