किसी की आहट… कोई तो है

दिव्या सिंह, प्रसिद्ध लेखिका


नैन पसारे रात निहारे कोई तो है
हम मतवारे जियरा हारे कोई तो है।
देख के भी देखा ना मन की मूरत को
जान के भी पहचान सकी ना सूरत को
सांझ सकारे मन के द्वारे कोई तो है।
दीप जला कर दीप बुझाना तुम जानो
हम हैं तुम्हारे तुम ये मानो ना मानो
क्यों चमके आकाश पे तारे
कोई तो है…
ये किसने दस्तक दी है मन के आंगन में
कैसी आग लगा दी बैरी मन में
कौन आया है मन के द्वारे कोई तो है
नैन पसारे रात निहारे कोई तो है
जो भी है परछाईं है और भरमाए मन
काहे किसी की आस तके मेरा आंगन
क्यों हर बार हम ही हारे कोई तो है
नैन पसारे रात निहारे कोई तो है।

2 thoughts on “किसी की आहट… कोई तो है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *